धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी के लिए संचालित मुख्यमंत्री शगुन योजना और कन्यादान योजना का महिला एवं बाल विकास विभाग विलय करने जा रहा है। विभाग ने दोनों योजनाओं को मिलाकर आगामी 2 अक्तूबर को लॉन्च हो रही ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना में सम्मिलित करने की पूरी तैयारी कर ली है।
इस एकीकरण के बाद पात्र लाभार्थियों को अलग-अलग योजनाओं के फेर में नहीं पड़ना पड़ेगा और उन्हें एक ही मंच से बेटियों के विवाह के लिए निर्धारित आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। विभागीय स्तर पर दोनों प्रमुख योजनाओं को एक करने की यह प्रशासनिक प्रक्रिया निरंतर जारी है।
प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य शादी अनुदान से जुड़ी योजनाओं को सरल, पारदर्शी और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने की प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है। वर्तमान में दोनों योजनाओं का संचालन अलग-अलग नियमों, शर्तों और प्रक्रियाओं के आधार पर हो रहा है, जिससे कई बार पात्र परिवारों को जरूरी जानकारी जुटाने और आवेदन करने में अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए संचालित मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में 51,000 रुपये और मुख्यमंत्री शगुन योजना के तहत 31,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। नई एकीकृत व्यवस्था प्रभावी होने के बाद लाभार्थियों को दो अलग-अलग योजनाओं की औपचारिकताओं से नहीं गुजरना होगा। इससे आवेदन प्रक्रिया सुगम होगी और पात्र परिवारों को तय समय पर सहायता राशि प्राप्त करने में आसानी होगी।
उधर, जिला कांगड़ा में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 139 और मुख्यमंत्री शगुन योजना के तहत 395 आवेदन विभाग को प्राप्त हुए हैं। हालांकि, विभाग में बजट उपलब्ध न होने के कारण नए वित्तीय सत्र की शुरुआत से लेकर अब तक किसी भी पात्र लाभार्थी को यह सहायता राशि जारी नहीं की जा सकी है। इससे जिले के कुल 534 परिवारों का आर्थिक लाभ अटका हुआ है और वे बजट जारी होने का इंतजार कर रहे हैं।
योजनाओं के विलय को लेकर प्रक्रिया जारी है। इन योजनाओं को ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ में शामिल किया जा रहा है। सरकार की मंजूरी और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अब आगामी 2 अक्तूबर को नई योजना को शुरू किया जाएगा। -अशोक कुमार शर्मा, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग, कांगड़ा