धर्मशाला। सड़क दुर्घटना में व्यक्ति की मौत के बाद उसकी पत्नी को बीमा की क्लेम राशि न देने पर अब एक बीमा कंपनी को नौ प्रतिशत ब्याज सहित 15 लाख रुपये चुकाने होंगे। साथ ही बीमा कंपनी को मुआवजे के तौर पर 25 हजार रुपये और न्यायालयी शुल्क 10 हजार रुपये भी मृतक की पत्नी को देने के आदेश दिए गए हैं। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य नारायण ठाकुर तथा आरती सूद की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
आयोग के समक्ष ममता देवी निवासी घार सुक्कड़ तहसील धर्मशाला ने इस बाबत शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायतकर्ता ने कहा था कि उनके पति विक्रमजीत ने अपनी बाइक का बीमा कंपनी की शाखा कोतवाली बाजार धर्मशाला में करवाया था। यह बीमा 9 सितंबर 2019 से 8 सितंबर 2020 तक वैध था। उनके पति का 11 दिसंबर 2019 को डाढ में एक्सीडेंट हो गया था जिसमें उनके पति की मृत्यु हो गई। इस बाबत पुलिस थाना पालमपुर में मामला दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता ने बताया था कि उसको बाइक और दस्तावेजों के बारे कोई जानकारी नहीं थी और न ही उसके रिश्तेदारों और पुलिस ने इस बारे कोई जानकारी दी।
इसके बाद जून 2023 के महीने में शिकायतकर्ता को मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) पालमपुर से नोटिस प्राप्त हुआ और न्यायाधिकरण के समक्ष उपस्थित होने पर शिकायतकर्ता को अन्य दस्तावेजों के साथ दुर्घटना सूचना रिपोर्ट (एआईआर) की प्रति प्राप्त हुई। वहीं, 17 अगस्त 2023 को शिकायतकर्ता ने दस्तावेजों के साथ दावे के लिए आवेदन किया। दावा आवेदन प्राप्त होने के बाद भी बीमा कंपनी ने न तो शिकायतकर्ता से संपर्क किया और न ही कोई जवाब दिया जिस पर उपभोक्ता ने इसकी शिकायत आयोग के समक्ष कर दी। आयोग ने सभी तथ्यों को जांचने के बाद शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।