धर्मशाला। जिला उपभोक्ता आयोग कांगड़ा ने बीमा दावे का भुगतान न करने पर टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी को खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कंपनी को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित उपभोक्ता को 23.50 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है। साथ ही कंपनी को 20 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये वाद व्यय भी उपभोक्ता को देना होगा।
यह आदेश आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की अदालत ने सुनाया है। राकेश कुमार निवासी कोटली, डाकघर गुनेहड़, तहसील बैजनाथ ने आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई थी। इसमें बताया था कि उन्होंने 31 दिसंबर 2021 को एक मालवाहक वाहन खरीदा था। इसका बीमा टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी से करवाया, जिसकी वैधता 31 दिसंबर 2022 तक थी।
राकेश कुमार के अनुसार तीन जुलाई 2022 को उनका वाहन लेह में एक सड़क दुर्घटना में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस बारे में बीमा कंपनी को सूचित किया। कंपनी के अधिकृत सर्वेक्षक ने उन्हें पांच जुलाई को मौके पर पहुंचने की जानकारी दी, लेकिन वह मौके पर नहीं पहुंचा। शिकायतकर्ता स्वयं उस दिन उपस्थित रहा। बाद में कंपनी के निर्देशानुसार वाहन की तस्वीरें और अन्य आवश्यक जानकारी भेज दी गई।
इसके बावजूद बीमा कंपनी की ओर से राकेश कुमार को बीमा राशि नहीं दी गई। कंपनी की इस लापरवाही और सेवा में कमी को देखते हुए शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली। आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों की जांच के बाद पाया कि बीमा कंपनी की ओर से सेवा में स्पष्ट रूप से कमी रही है। आयोग ने आदेश में यह भी निर्देश दिया कि उपभोक्ता अपने क्षतिग्रस्त वाहन की आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) रद्द करवाकर इसकी सूचना बीमा कंपनी और आयोग दोनों को दे।