धर्मशाला। टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज में इंसुलिन पंप वितरित किए गए। बाल रोग विभाग के डॉ. अतुल गुप्ता ने यह पहल की। इस दौरान प्रिंसिपल डॉ. मिलाप शर्मा और विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा भी मौजूद रहीं।
डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज में बच्चों को दिन में कई बार इंसुलिन इंजेक्शन लेने, नियमित रूप से रक्त शर्करा की जांच करने और संतुलित आहार बनाए रखने की जरूरत होती है। इंसुलिन पंप थैरेपी इस समस्या का समाधान है। प्रत्येक पंप की कीमत करीब 2.5 लाख रुपये है, जिसे सरकार ने निशुल्क उपलब्ध कराया है।
कॉलेज में बच्चों और उनके अभिभावकों को नियमित रूप से भर्ती कर डायबिटीज सेल्फ मैनेजमेंट एजुकेशन कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण भी दिया जाता है। डॉ. सीमा शर्मा ने नियमित शुगर मॉनिटरिंग और संतुलित आहार के महत्व पर जोर दिया। प्रिंसिपल डॉ. मिलाप शर्मा ने कहा कि पीडियाट्रिक एंडोक्राइन क्लिनिक में लगभग 140 बच्चे पंजीकृत हैं।