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Kangra News: बारूद के ढेर पर इंदौरा, आग बुझाने वाले 30 किमी दूर बैठे

Sun, 04 Feb 2024 03:18 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
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इंदौरा (कांगड़ा)। पंजाब की सीमा के साथ सटा औद्योगिक क्षेत्र इंदौरा पूरी तरह से बारूद के ढेर पर है। औद्योगिक क्षेत्र से नजदीकी अग्निशमन केंद्र भी 30 किलोमीटर दूर नूरपुर में है। अगर बद्दी जैसा अग्निकांड इस औद्योगिक क्षेत्र में पेश आता तो आग पर काबू पाना पूरी तरह से मुश्किल होगा। अग्निशामक गाड़ियों के पहुंचने तक सब कुछ राख हो चुका होगा। इस औद्योगिक क्षेत्र में फार्मा, शीशा, तार फैक्टरी, स्टील और हथियारों सहित अन्य कई प्रकार के उद्योग चल रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार पूर्व में रही सरकारों में इंदौरा को कुछ लघु उद्योग तो दे, लेकिन यहां पर आग जैसी घटनाएं पेश आने पर उनसे निपटने के लिए कोई भी कारगर कदम नहीं उठाए गए। अगर औद्योगिक क्षेत्र में घटना या दुर्घटना हो जाती है, तो वहां पर व्यवस्था के नाम पर कोई भी पुख्ता इंतजाम नहीं है।
औद्योगिक क्षेत्र के पास अस्पताल नहीं, सड़क भी बदहाल
औद्योगिक क्षेत्र मलोट और कंदरोड़ी के आसपास न तो कोई ढंग का अस्पताल है और न ही कोई अग्निशमन केंद्र। इसके अलावा यहां की सड़कों की हालत भी खस्ता है। अगर आगजनी जैसी घटना घटित होने पर यहां अग्निशमन की गाड़ियों के पहुंचने तक काफी नुकसान हो चुका होगा। औद्योगिक क्षेत्र से अगर अस्पताल की बात करें तो इंदौरा अस्पताल का लगभग आठ किलोमीटर का सफर है, जिसमें रोड की हालत काफी दयनीय है। एंबुलेंस की बात करें तो इंदौर अस्पताल में केवल एक एंबुलेंस है, जबकि अस्पताल में केवल 10 बिस्तरों की सुविधा है। वहां उपचार सुविधा भी नाममात्र है, अगर पठानकोट की बात करें लगभग 12 किलोमीटर का सफर पठानकोट के लिए तय करना पड़ता है।
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एनडीआरएफ भी डेढ़ घंटे बाद पहुंचेगी
अगर घटना की स्थिति में एनडीआरएफ की टीम को बुलाना पड़े तो एनडीआरएफ की टीम इंदौरा से लगभग 30 किलोमीटर दूर नूरपुर में है, जिसको आपातकाल की स्थिति में बुलाना पड़े तो उनको आने में भी समय लगता है। सड़कों की हालत खराब होने के कारण 30 किलोमीटर का सफर तय करने में लगभग एक से डेढ़ घंटा लग सकता है।

अगर अग्निशमन केंद्र की बात करें तो इंदौरा में कोई भी अग्निशमन केंद्र नहीं है। दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में अगर अग्निशन केंद्र से गाड़ी मंगवानी पड़े तो नूरपुर, जसूर या जवाली से अग्निशमन की गाड़ी को बुलाना पड़ता है, जिसको आने में जसूर से लगभग एक से डेढ़ घंटा, जबकि जवाली से लगभग दो से ढाई घंटे लगेंगे।



एसडीएम इंदौरा सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि औद्योगिक मालिकों को आग जैसी दुर्घटना से निपटने के लिए उनके द्वारा पुख्ता इंतजाम के निर्देश दिए गए हैं। पानी और ऑटोमेटिक फायर फाइटिंग व्यवस्था को औद्योगिक क्षेत्रों लगाने बारे कहा गया है।
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