राजा का तालाब (कांगड़ा)। पौंग बांध संघर्ष समिति और प्रदेश पौंग बांध विस्थापित समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से राजस्थान के श्रीगंगानगर में सीमा से 50 किलोमीटर के भीतर स्थित सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जों को तत्काल हटाने की मांग की है। उनका का कहना है कि इससे सर्वोच्च न्यायालय और प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित होगा। 55 वर्षों से पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे पौंग बांध विस्थापितों को उनका वैधानिक अधिकार मिल सकेगा।
समिति के प्रदेशाध्यक्ष अश्वनी शर्मा, प्रदेश प्रधान हंस राज, महासचिव हुकुम चंद गुलेरी और वरिष्ठ उपाध्यक्ष एमएल कौंडल ने बताया कि श्रीगंगानगर जिला अत्यंत संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र है।
हाल ही में जिला कलेक्टर ने 6-ए श्रेणी की सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने के आदेश जारी किए थे लेकिन बाद में यह कार्रवाई रोक दी गई। उनका आरोप है कि यह निर्णय प्रभावशाली कब्जाधारियों के दबाव में लिया गया।
संयुक्त समिति के अनुसार 6-ए श्रेणी के अंतर्गत पौंग बांध विस्थापितों के लिए आरक्षित 1188 मुरब्बे भूमि पर अवैध कब्जे हैं। उनका दावा है कि कई कब्जाधारियों ने 30 से 40 मुरब्बों तक पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है जबकि यह भूमि विस्थापितों के पुनर्वास के लिए आरक्षित है।
समिति ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की सिविल रिट में राजस्थान सरकार को ऐसे अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए गए थे।
इसके अतिरिक्त हाल ही में हिमाचल उच्च न्यायालय ने भी श्रीगंगानगर जिला प्रशासन को पौंग बांध विस्थापितों के पक्ष में भूमि आवंटन संबंधी आदेशों के पालन के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद प्रभावित परिवार अब तक पुनर्वास के अधिकार से वंचित हैं।
समिति ने यह भी चिंता जताई कि भारत-पाक सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर विषय हैं। इसलिए इनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।
एमएल कौंडल वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदेश पौंग बांध समिति- फोटो : samvad
एमएल कौंडल वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदेश पौंग बांध समिति- फोटो : samvad
एमएल कौंडल वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदेश पौंग बांध समिति- फोटो : samvad