नूरपुर (कांगड़ा)। क्षेत्र के बहुप्रतीक्षित 50 बिस्तरों वाले मातृ-शिशु अस्पताल को शुरू करवाने की मांग को लेकर अकिल बख्शी की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पांचवें दिन भी जारी रही। अकिल बख्शी और अन्य आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेताया है कि मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ तो चक्का जाम कर आंदोलन को सड़क पर उतारा जाएगा। इसके बाद उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
चार दिन बाद प्रशासन की सक्रियता तो सामने आई लेकिन मांगों पर कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। आंदोलनकारियों का कहना है कि केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। मांगों पर स्पष्ट और ठोस कार्रवाई होने के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा।
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अकिल बख्शी ने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है बल्कि नूरपुर की जनता के हितों और क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनता से जुड़ा इतना महत्वपूर्ण मुद्दा लंबे समय से उठाया जा रहा है तो सरकार के प्रतिनिधि अब तक आंदोलन स्थल पर पहुंचकर बातचीत कर समाधान क्यों नहीं निकाल पाए हैं।
आंदोलनकारियों ने कहा कि चार दिन तक भूख हड़ताल के बाद प्रशासन की सक्रियता सामने आई है लेकिन बातचीत से आगे बढ़कर निर्णय और समाधान अभी बाकी है। 24 घंटे के भीतर कोई ठोस पहल नहीं हुई तो नूरपुर में चक्का जाम की स्थिति बन सकती है।