परागपुर (कांगड़ा)। 50 के दशक में परागपुर कस्बा जब पंजाब प्रांत का भाग था हर लिहाज से विकसित था। बात चाहे शिक्षा की हो या विकास की या स्वास्थ्य और व्यापार की। परागपुर सभी सुविधाओं में अव्वल था, पर हिमाचल में विलय में बाद परागपुर का दर्जा तो क्या बढ़ना यहां के संस्थानों का स्तर भी कम कर दिया गया। परागपुर का सिविल अस्पताल भी उन्हीं में से एक संस्थान है। यहां पर स्वास्थ्य उपचार की रात्रि को भी सुविधा जाती थी। आलम यह था कि दो चिकित्सक, दंत चिकित्सक, आई रिफ्रेसनिस्ट, स्टाफ नर्स, लिपिक, चालक के पद सृजित थे। अब इस अस्पताल का दर्जा कम कर पीएचसी का कर दिया गया है।
कुछ के पद या तो समाप्त कर दिए गए या फिर कुछ को अन्य अस्पताल में तबदील कर दिए गए। तत्कालीन परागपुर विस क्षेत्र में कोई भी बड़ी दुर्घटना हो जाने पर इस अस्पताल में लोगों का उपचार किया जाता था, पर अब तो यह अस्पताल नाममात्र का बनकर रह गया है। बीते माह अपने परागपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 50 के दशक के बने हुए अस्पताल के जर्जर हो चुके भवन के स्थान पर नया भवन बनाने की घोषणा की थी। परंतु अभी तक उनके द्वारा की गई आधिकारिक घोषणा पर कार्रवाई होना बाकी है।
सूत्रों की मानें तो सीएम कार्यालय ने सीधे तौर पर पीएचसी परागपुर के चिकित्सा अधिकारी से पीएचसी परागपुर को स्तरोन्नत करने की प्रस्तावना रिपोर्ट मांगी है, इसकी अभी तक कोई भी आधिकारिक पुष्टि नही की गई है न ही स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों को कोई जानकारी।
लोग बोले- सीएम की घोषण चढ़े सिरे
परागपुर के नीरज शर्मा, दीपक पटियाल, भगवान दास, दिनेश शर्मा, अजय शर्मा, संजीव सोनी, कृष्ण गोपाल, संजय कुमार, सेंटी शाह, दिनेश कौल, दीपक सूद, अभिषेक सोनी, राजेश, राहुल ने प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य सचिव से मांग की है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह के द्वारा जो घोषणा परागपुर पीएचसी के भवन बनाने को लेकर की गई है उसे अमलीजामा पहनाने के निर्देश और स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को दें। ताकि प्रदेश के सबसे पुराने स्वास्थ्य संस्थानों में से एक परागपुर अस्पताल भी फिर अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जाना जाने लगे।
पीएचसी परागपुर के भवन और सीएचसी में स्तरोन्नत करने की कोई भी रिपोर्ट ध्यान में नहीं है। मुख्यमंत्री की घोषणा की बकायदा प्रस्तावना रिपोर्ट तैयार की जाती है।
-डॉ. राजेश गुलेरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, धर्मशाला
परागपुर पीएचसी को स्तरोन्नत करने और मुख्यमंत्री की घोषणा का कोई भी मामला मेरे ध्यान में नहीं है।
-डॉ. गोपाल बैरी, निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं ओर परिवार कल्याण विभाग