धर्मशाला। कछियारी से भंगवार तक फोरलेन किनारे बरसात के दौरान बार-बार हो रहे भूस्खलन का अब स्थायी समाधान निकाला जाएगा। निर्माण कंपनी बरसात का मौसम समाप्त होने के बाद प्रभावित पहाड़ियों का विस्तृत निरीक्षण कर तकनीकी सुरक्षा कार्य शुरू करेगी। इसके तहत कमजोर ढलानों पर फिर से रॉक बोल्टिंग कर मजबूत सुरक्षा जाले (ग्रीन नेट) लगाए जाएंगे, जिससे राहगीर और वाहन चालक बेखौफ आवाजाही कर सकेंगे।
कछियारी से भंगवार के बीच कई संवेदनशील स्थानों पर बारिश के दौरान पहाड़ी से मलबा, पत्थर और बोल्डर गिरने का सिलसिला जारी रहता है। इससे न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि हाईवे से गुजरने वाले वाहनों के लिए गंभीर हादसों का जोखिम भी बना रहता है। कंपनी ने ऐसे सभी खतरनाक स्थान को चिह्नित कर लिया है, जहां मानसून खत्म होते ही सुरक्षा कार्य युद्धस्तर पर शुरू किए जाएंगे।
यह है रॉक बोल्टिंग तकनीक
ड्रिलिंग और पाइप फिटिंग: ड्रिलिंग मशीन की मदद से पहाड़ी में लगभग पांच फीट गहरे सुराख बनाकर लोहे की मजबूत पाइपें डाली जाती हैं।
प्रेशर ग्राउटिंग: पाइपों के अंदर उच्च दबाव (प्रेशर) के साथ सीमेंट और बजरी का मिश्रण भरकर उन्हें ठोस आधार दिया जाता है।
नेटिंग और कसाव: इसके बाद रॉक बोल्ट के ऊपर विशेष सुरक्षा जाले (ग्रीन मेश) बिछाकर बोल्ट के साथ पूरी ताकत से कस दिया जाता है जिससे ढीली चट्टानों और मलबे का गिरना रुक जाता है।
-
बरसात खत्म होते ही फोरलेन किनारे जिन-जिन पहाड़ियों पर भूस्खलन हुआ है, उन्हें दोबारा रॉक बोल्ट तकनीक से सुदृढ़ किया जाएगा। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत भी की जाएगी ताकि वाहन चालकों को किसी प्रकार की असुविधा या खतरे का सामना न करना पड़े। -धनंजय मिश्रा, साइट इंजीनियर, निर्माण कंपनी