फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खरीफ की फसलों का उत्पादन बढ़ाने में किसानों की करें मदद : कृषि मंत्री

Sat, 03 May 2025 12:06 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
विज्ञापन
कृषि विवि का निरीक्षण करते कृषि मंत्री चंद्र कुमार । स्त्रोत विवि
विज्ञापन
पालमपुर (कांगड़ा)। कृषि एवं पशुपालन मंत्री चौधरी चंद्र कुमार ने कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों से किसानों को खरीफ फसलों का उत्पादन बढ़ाने में मदद करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मौसम अनुकूल कृषि राज्य में खाद्य फसलों, तिलहन, दालों और सब्जियों के उत्पादन को बढ़ाने में मदद कर सकती है। उन्होंने साथ ही हल्दी की खेती की अधिक संभावनाओं को तलाशने के निर्देश दिए। कृषि मंत्री शुक्रवार को कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर पहुंचे और खरीफ की फसलों पर हुई आयोजित कार्यशाला मुख्यातिथि शामिल हुए है। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसानों को स्वावलंबी बनाने और उनकी आर्थिकी को सुदृढ़ बनाने में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर का महत्वपूर्ण योगदान है।
विज्ञापन


कृषि विश्वविद्यालय अनुसंधान और शोध का केंद्र हैं, जो किसानों की समस्याओं को दूर करने और उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में अपनी भूमिका निभाता है। प्रदेश में खेतीबाड़ी सबसे बड़ा व्यवसाय है। किसान खेतीबाड़ी से ही अपनी आजीविका का निर्वहन कर रहे हैं। किसान फसल विविधिकरण को अपनाकर नकदी फसलों की तरफ अपना रुझान अधिक करें ताकि उनकी आर्थिकी और सुदृढ़ हो। कार्यशाला में प्रदेश में हल्दी की खेती और उपयोग की संभावना को तलाशने के लिए विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इसमें उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार कच्ची हल्दी को 90 प्रति किलो की दर से खरीदने की प्रक्रिया को शुरू करने जा रही है। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नवीन कुमार और निदेशक कृषि विभाग कुमद सिंह मौजूद रहीं। उन्होंने कृषि अधिकारियों को क्लस्टर आधारित खेती करने के लिए किसानों को जागरूक करने को भी कहा। इससे पहले कृषि विवि के कुलपति ने किसानों के हितों के लिए किए जा रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी दी। इस मौके पर निदेशक प्रसार शिक्षा विनोद कुमार, अतिरिक्त निदेशक (एसपीएएनएफ) डॉ. रविंद्र सिंह जसरोटिया, संयुक्त निदेशक राहुल कटोच, नीति सोनी, कृषि विवि की रजिस्ट्रार मधु चौधरी समेत कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, कृषि अधिकारी और प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें