कांगड़ा। प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा इन दिनों खुद बीमार नजर आ रहा है। अस्पताल प्रशासन और सरकार की अनदेखी के कारण यहां अव्यवस्थाओं का अंबार लगने से स्वास्थ्य सेवाएं ही वेंटिलेटर पर हैं। इसका खामियाजा दूर-दराज से आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
मरीजों को इलाज से ज्यादा तारीखें मिल रही हैं। सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को दो से ढाई महीने बाद का समय दिया जा रहा है। वहीं, एमआरआई के लिए यह वेटिंग पीरियड तीन महीने तक पहुंच गया है। गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो रही है।
खराब मशीनें और प्रशासनिक नाकामी : रेडियोलॉजी विभाग एक डिजिटल एक्स-रे मशीन के सहारे चल रहा है, जो अधिक बोझ से कभी भी दम तोड़ सकती है। एक अन्य एक्स-रे मशीन पिछले एक साल से खराब पड़ी है। हद तो तब हो गई जब अप्रैल माह में आई चार नई डायलिसिस मशीनें आज तक इंस्टॉल ही नहीं की गईं। अस्पताल में आठ और मशीनों की सख्त जरूरत है।
डॉक्टरों का भारी टोटा : कॉलेज में 25 क्लीनिक विभाग हैं और हर विभाग में औसतन चार से चार डॉक्टरों की कमी चल रही है। सुरक्षा कर्मियों की कमी भी चिंता का विषय है।
मेडिकल कॉलेज में ये समस्याएं भी बरकरार
लिफ्ट : एक ब्लॉक में 4 लिफ्ट होने के बावजूद केवल 1 या 2 ही काम करती हैं।
पार्किंग : पार्किंग की जगह न होने से तीमारदार सड़कों पर गाड़ियां खड़ी करने को मजबूर हैं।
फायर सेफ्टी : फायर सिस्टम की हालत देखकर लगता है कि लगने के बाद इसकी कभी जांच ही नहीं हुई। आगजनी होने पर यहां भारी नुकसान हो सकता है।
सफाई : वार्डों और विभागों के शौचालयों की हालत अत्यंत दयनीय है।
धीमा काम : मदर एंड चाइल्ड अस्पताल में रैंप का निर्माण कछुआ चाल से चल रहा है।
मशीनों और पार्किंग की कमी के बारे में सरकार और विभाग को लिखित में कई बार बताया गया है, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। -डॉ. विवेक बनियाल. चिकित्सा अधीक्षक, टीएमसी
टांडा में चिकित्सकों की कमी की समस्या चली हुए है। डॉक्टरों की कमी को लेकर हर 6 महीने में सरकार को रिपोर्ट भेजी जाती है, लेकिन हमें अभी तक नए चिकित्सक नहीं मिले हैं। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्राचार्य, टीएमसी