धर्मशाला। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला के प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा है कि गुरु परंपरा केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसे एक सतत जीवंत विचारधारा के रूप में समझने की आवश्यकता है। बुधवार को हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पंजाबी एवं डोगरी विभाग द्वारा आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में उन्होंने बतौर मुख्यातिथि अपने विचार साझा किए।
यह संगोष्ठी भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सौजन्य से ‘श्री गुरु तेग बहादुर : जीवन, वाणी और शहादत’ विषय पर आयोजित की गई थी। प्रो. अग्निहोत्री ने जोर देकर कहा कि गुरु साहिबान का दर्शन समाज को दिशा देने वाली एक निरंतर बहती धारा है। संगोष्ठी के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों में विद्वानों ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन दर्शन पर विस्तार से चर्चा की।
गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के डॉ. मनमोहन ने रेखांकित किया कि गुरु तेग बहादुर का चिंतन गुरु नानक देव जी द्वारा स्थापित मानवीय मूल्यों की परंपरा से गहराई से जुड़ा है। वहीं प्रो. जगबीर सिंह ने आगाह किया कि इतिहास को भूलना अपनी जड़ों से कटने जैसा है। अकादमिक सत्रों के दौरान वक्ताओं ने धर्म, राजधर्म और गुरु परंपरा के समकालीन महत्व पर शोध पत्र प्रस्तुत किए।