धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन जिला कांगड़ा इकाई के अध्यक्ष डॉ. उदय सिंह और कोषाध्यक्ष डॉ. सुनील भट्ट ने कृषि मंत्री को संघ की मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। वीरवार को धर्मशाला में सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से चिकित्सा अधिकारियों के कैडर से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया गया और मुख्यमंत्री तक इन विषयों को पहुंचाने का आग्रह किया। पदाधिकारियों ने सबसे प्रमुख मांग महंगाई भत्ता को लेकर उठाई। एसोसिएशन ने मांग की कि सरकार चिकित्सा अधिकारियों को शीघ्र डीए जारी करे। इसके अलावा जॉब ट्रेनी पॉलिसी को लेकर भी कड़ा विरोध दर्ज किया गया।
एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा कि मेडिकल ग्रेजुएट्स पहले ही मेडिकल कॉलेजों में एक वर्ष की रोटेटरी इंटर्नशिप पूरी करते हैं। ऐसे में सरकारी सेवा में नियुक्ति के समय ट्रेनी बनाए जाने का कोई औचित्य नहीं है। हिमाचल सरकार की जॉब ट्रेनी पॉलिसी, नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों के विरुद्ध लागू की गई है। नॉन प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) को लेकर भी सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। एसोसिएशन ने कहा कि चिकित्सा अधिकारियों को उनके ज्वाइनिंग डेट से ही एनपीए बहाल किया जाना चाहिए। बैठक में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की भारी कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। रक्कड़, कस्बा कोटला, गारली, ब्लॉक दाड़ी सहित कई क्षेत्रों में केवल एक ही मेडिकल ऑफिसर तैनात है, जिन्हें 24 घंटे सेवाएं देनी पड़ रही हैं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि जब तक नए डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होती, तब तक ऐसे सीएचसी में नाइट ड्यूटी को समाप्त किया जाना चाहिए। बैठक के अंत में एसोसिएशन के महासचिव डॉ. अंकुश ने कहा कि यदि सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया तो आगे रणनीति तय की जाएगी। इस दौरान कृषि मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि जल्द उनकी समस्याओं को कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा।