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Kangra News: आयुर्वेदिक अस्पतालों में इलाज कराना महंगा

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धर्मशाला के जिला आयुर्वेदिक अस्पताल के पुरुष वार्ड में उपचाराधीन मरीज व उनके तीमारदार। अमर उजाल
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धर्मशाला। जिले के आयुर्वेदिक अस्पताल धर्मशाला, देहरा और राजीव गांधी आयुर्वेदिक कॉलेज पपरोला में उपचार महंगा होगा। प्रदेश सरकार ने आयुष्मान भारत और हिम केयर स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत आयुर्वेदिक संस्थानों में मिलने वाली उपचार सुविधा बंद कर दी है। इससे उन लोगों पर सबसे अधिक बोझ पड़ेगा जो आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जरिए उपचार करवाते थे।
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विभाग के अनुसार वर्ष 2025-26 में जिले के आयुर्वेदिक संस्थानों में करीब 10.14 लाख मरीजों का उपचार किया गया। इनमें बड़ी संख्या ऐसे रोगियों की रही जिन्होंने विभिन्न रोगों के उपचार के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को अपनाया।
जिला आयुर्वेदिक अस्पताल धर्मशाला में हिम केयर योजना की देनदारी 4.90 लाख रुपये पहुंच गई है। पिछले साल यहां 1,09,283 ओपीडी रही थी। 16,173 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए थे। इस साल अभी तक 30,759 ओपीडी और 621 आईपीडी रही है। धर्मशाला और देहरा आयुर्वेदिक अस्पताल में रोजाना ओपीडी 50-50 से अधिक रहती है। आयुर्वेदिक कॉलेज पपरोला में ओपीडी 500 से अधिक रहती है।
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सूत्रों के अनुसार आयुर्वेदिक अस्पतालों में जो दवाइयां आती हैं वे काफी जल्दी खत्म हो जाती हैं। नई सप्लाई आने से लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। मजबूरन निजी स्टोरों में पैसे खर्चकर दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल धर्मशाला में उपचाराधीन मरीजों के तीमारदारों रमेश, अनीता, सुषमा ने बताया कि सरकार का यह फैसला गलत है। इसका सीधा असर गरीब वर्ग पर पड़ेगा। सरकार इस फैसले को वापस ले।
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आयुर्वेदिक अस्पतालों में सरकार ने हिम केयर और आयुष्मान योजना बंद कर दी है। पहले मरीजों को योजना के तहत निशुल्क लाभ मिल जाता था मगर अब उपचार के लिए पैसे खर्च करने पड़ेंगे। -डॉ. बृजनंदन शर्मा, जिला आयुष अधिकारी, कांगड़ा
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