इंदौरा (कांगड़ा)। ब्यास नदी में आई भीषण बाढ़ को लगभग एक माह का समय बीत चुका है, लेकिन मंड क्षेत्र के किसानों की दुश्वारियां कम नहीं हो रही हैं। बाढ़ का पानी तो उतर गया है, लेकिन तबाह हुए बिजली के खंभे और टूटे तार आज भी खेतों में बिखरे पड़े हैं। इससे मंड-घंडरां क्षेत्र में खेतों की बिजली आपूर्ति पिछले तीन माह से पूरी तरह ठप पड़ी है। स्थानीय किसानों ने बताया कि घंडरां क्षेत्र में लगभग 15 से 16 मोटरें बिजली न होने के कारण बंद पड़ी हैं, जिससे सिंचाई पूरी तरह बाधित हो चुकी है। किसानों का कहना है कि गन्ने की फसल अब सूखने की कगार पर है, जबकि धान की फसल पहले ही बाढ़ में बर्बाद हो चुकी थी।
किसान कुलविंदर, जसविंद्र सिंह सहित अन्य ने कहा कि पहले बाढ़ की विनाशकारी मार झेली। इसमें खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं और उपजाऊ जमीन तक बह गई। अब जो फसलें किसी तरह बची हैं, उन्हें भी बिजली ठप होने से पानी नहीं मिल पा रहा है। गन्ना खेतों में ही सूखने लगा है। बिजली आपूर्ति न होने से किसान न तो बाढ़ से बची फसल को बचा पा रहे हैं और न ही नई फसलों की बुवाई की तैयारी कर पा रहे हैं, क्योंकि ट्यूबवेल और मोटरें बिजली के बिना बेकार पड़ी हैं। किसानों ने बिजली बोर्ड प्रबंधन से जल्द आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर टूटे हुए बिजली ढांचे की मरम्मत जल्द नहीं की गई तो बचा हुआ गन्ना भी पूरी तरह सूख जाएगा, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। किसानों ने सरकार से भी इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि खेतों में अब गेहूं की बिजाई शुरू हो रही है और विद्युत बोर्ड ने समय पर काम नहीं किया तो गेहूं की फसल बीजने के बाद खेतों में बिजली बहाली का कार्य करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
इस संबंध में सहायक अभियंता इंदौरा शंकर दयाल ने बताया कि इस कार्य को लेकर टेंडर प्रक्रिया जारी है। जैसे ही आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी हो जाएगी, बिजली लाइन को बहाल कर दिया जाएगा।