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Kangra News: फेस रीडिंग सॉफ्टवेयर बना मनरेगा मजदूरों की मुसीबत

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धर्मशाला। मनरेगा मजदूरों के लिए लागू की गई नई तकनीक अब उनके हक में बाधा बनती नजर आ रही है। पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया फेस रीडिंग सॉफ्टवेयर तकनीकी खामियों के चलते मजदूरों की आजीविका पर भारी पड़ रहा है। फेस रीडिंग सॉफ्टवेयर पर उनकी उपस्थिति ही दर्ज नहीं हो पा रही है।
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जानकारी के अनुसार कई मजदूरों की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद सॉफ्टवेयर उनका चेहरा पहचानने में बार-बार विफल हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की खराब स्थिति इस समस्या को और अधिक जटिल बना रही है। स्थिति यह है कि मजदूर काम पर तो समय से पहुंच रहे हैं, लेकिन फेस स्कैन न हो पाने के कारण उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही।
घंटों इंतजार के बाद भी जब तकनीकी बाधा दूर नहीं होती तो मजदूरों को बिना दिहाड़ी लगाए ही घर लौटना पड़ रहा है। हाजिरी दर्ज करने वाले कर्मचारियों के साथ ही मजदूर भी इस पर सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि तकनीक का उद्देश्य कार्यप्रणाली को सुगम बनाना होना चाहिए न कि मजदूरों के अधिकारों का हनन। उन्होंने तत्काल व्यवस्था में सुधार करने की मांग की है।
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जिला विकास अधिकारी कांगड़ा भानु प्रताप सिंह ने कहा कि विशेष रूप से बड़ा भंगाल जैसी दुर्गम ग्राम पंचायतों में नेटवर्क की समस्या के कारण यह दिक्कत देखी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले की अन्य पंचायतों से फिलहाल इस तरह की कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
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