नगरोटा बगवां में यूनियन के संस्थापक अध्यक्ष ओपी भारद्वाज को श्रद्धांजलि अर्पित करते यूनियन पदाध
नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने राज्य सरकार के बिजली बोर्ड के विघटन के प्रस्ताव का विरोध किया है। यूनियन ने कहा है कि बिजली बोर्ड का विघटन प्रदेश की जनता के हित में नहीं है। इससे जहां उपभोक्ताओं को दी जा रहीं सेवाएं प्रभावित होंगी, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली की दरें भी बढ़ेंगी।
बुधवार को नगरोटा बगवां में यूनियन के संस्थापक अध्यक्ष दिवंगत ओपी भारद्वाज की 42वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह के बाद यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कामेश्वर दत्त शर्मा और महासचिव हीरा लाल वर्मा ने पत्रकार वार्ता की। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड का 64 प्रतिशत राजस्व औद्योगिक क्षेत्र से आता है। इसके विभाजन से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली दरों में वृद्धि होगी।
यूनियन नेताओं ने मंत्री एवं कैबिनेट सब कमेटी के अध्यक्ष राजेश धर्माणी के उस बयान की आलोचना की, जिसमें उन्होंने बिजली बोर्ड के 40 वर्ष पुरानी विद्युत गृहों को सरकार को वापस करने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ये परियोजनाएं हमेशा के लिए बिजली बोर्ड को दी गई थीं। सरकार के साथ कोई इस तरह का कार्यन्वयन समझौता नहीं हुआ है। इन विद्युत गृहों के बोर्ड़ से छिनने से बिजली बोर्ड को मार्केट से महंगी दरों में बिजली खरीदनी पडेगी और प्रदेश के उपभोक्ताओं की विद्युत दरों में वृद्धि होगी।
यूनियन ने बिजली बोर्ड में पुरानी पेंशन को लागू करने में की जा रही देरी पर गहरी चिंता जताई और बोर्ड में पुरानी पेंशन को शीघ्र लागू करने की भी मांग की।
स्व. ओपी भारद्वाज की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
बुधवार को नगरोटा बगवां में यूनियन के संस्थापक अध्यक्ष स्व. ओपी भारद्वाज की 42वीं पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए और एक श्रद्धांजलि सम्मेलन आयोजित किया गया। इस मौके पर बिजली बोर्ड पेंशनर्ज फोरम के वरिष्ठ उप प्रधान कुलदीप खरवाड़ा, दिवंगत ओपी भारद्वाज के सुपुत्र इंजीनियर आदर्श भारद्वाज के अलावा वर्तमान और पूर्व में रहे यूनियन के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।