धर्मशाला। डिजिटल दौर में चिट्ठियों का चलन भले ही कम हुआ हो लेकिन डाक विभाग की प्रासंगिकता और उपयोगिता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। समय की मांग के साथ डाक सेवाओं का स्वरूप बदल चुका है। आज डाकिया केवल पारंपरिक पत्र बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्पीड पोस्ट, पार्सल, डिजिटल बैंकिंग और बीमा सेवाएं भी सीधे लोगों के घर-द्वार तक पहुंचा रहा है।
धर्मशाला डाक मंडल ने छह महीनों में 2,59,413 पार्सल की बुकिंग कर लगभग 2.90 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल मैक्लोडगंज के उपडाकघर ने भी अप्रैल से सितंबर तक एक करोड़ रुपये से अधिक की मेल बुकिंग की है। इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान मंडल में कुल 4,56,817 बुकिंग दर्ज की गईं। इससे विभाग को 4.85 करोड़ रुपये की कमाई हुई है।
ई-कॉमर्स और ऑनलाइन खरीदारी के तेजी से बढ़ते चलन ने डाक विभाग के कारोबार को नई रफ्तार दी है। आज दूरदराज के क्षेत्रों तक सामान भेजने और मंगवाने के लिए लोग डाक सेवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से अगस्त में बुकिंग दरों में कुछ संशोधन भी किया गया था।
ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में डाकघर आज भी लोगों की वित्तीय जरूरतों का सबसे बड़ा आधार बने हुए हैं। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी), बचत खाते, आरडी और डाक जीवन बीमा जैसी सुविधाएं ग्रामीणों को घर के पास ही मिल रही हैं। बैंकिंग लेनदेन पूरी तरह ऑनलाइन होने से उपभोक्ता डिजिटल सेवाओं का भी भरपूर लाभ उठा रहे हैं। डाक विभाग जगह-जगह वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित कर ग्रामीणों को इन आधुनिक सुविधाओं के प्रति जागरूक कर रहा है। धर्मशाला मंडल के अधीक्षक रविंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य जनभागीदारी को बढ़ावा देना और कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाना है।
15 अक्तूबर तक मनेगा राष्ट्रीय डाक सप्ताह
9 अक्तूबर: विश्व डाक दिवस
10 अक्तूबर: राष्ट्रीय डाक दिवस
12 अक्तूबर: फिलेटली दिवस
13 अक्तूबर: वित्तीय समावेशन एवं सीसीएस दिवस
14 अक्तूबर: डाक एवं पार्सल दिवस
15 अक्तूबर: प्रौद्योगिकी एवं नवाचार दिवस
एक करोड़ से अधिक कमाई, फिर भी किराये के भवन में मैक्लोडगंज डाकघर
धर्मशाला मंडल के तहत दो मुख्य डाकघर, 59 उपडाकघर और 292 शाखा डाकघर कार्यरत हैं। इनमें से केवल नौ उपडाकघर ही विभागीय भवनों में संचालित हो रहे हैं। शेष 50 उपडाकघर और सभी 292 शाखा डाकघर किराये के परिसरों में चल रहे हैं। छह माह में एक करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व जुटाने वाला प्रमुख मैक्लोडगंज उपडाकघर भी वर्षों से किराये के भवन में ही कार्य करने को विवश है।