लंबागांव क्षेत्र में बिजली लाइन को ठीक करने में जुटे बिजली बोर्ड के कर्मी। संवाद
लंबागांव (कांगड़ा)। बिजली बोर्ड अपने कर्मचारियों की जान से खिलवाड़ कर रहा है। सुरक्षा का पूरा इंतजाम किए बिना बिजली बोर्ड अपने कर्मचारियों से हाई वोल्टेज लाइनों को ठीक करवा रहा है। कर्मचारी बिना सुरक्षा किट के बिजली के खंभों पर चढ़कर हाई वोल्टेज लाइनों को दुरुस्त करने में लगे हैं। बेशक पीछे से बिजली बंद की जा रही है, लेकिन इतिहास को देखें तो कई दर्दनाक हादसे हो चुके हैं।
जानकारी के अनुसार विद्युत उपमंडल जयसिंहपुर के अंतर्गत आने वाले लंबागांव क्षेत्र में शुक्रवार को आए अंधड़ और आसमानी बिजली से बिजली बोर्ड की एचटी लाइनों के 12 से भी ज्यादा डिस्क इंशुलेटर और पिन इंशुलेटर खराब हो गए थे। इस कारण लंबागांव क्षेत्र के करीब 30 ट्रांसफार्मरों की बिजली प्रभावित हो गई। एचटी इंशुलेटरों के खराब हो जाने से क्षेत्र के 12 से अधिक गांव अंधेरे में डूब गए थे। बिजली के गिरने से इंशुलेटरों के खराब हो जाने से विभागीय कर्मचारियों को हर खंभे का इंशुलेटर चेक करना पड़ रहा था।
यहीं नहीं, अंधड़ के कारण एचटी और एलटी लाइनों पर पेड़ भी गिर गए थे। इससे काफी जगहों पर बिजली की लाइनें भी टूट गई थीं। इंशुलेटरों पर बिजली गिरने और अंधड़ से जगह-जगह तारों के टूट जाने से बिजली व्यवस्था को बहाल करने में बेहद कठिनाई हो रही थी। हालांकि बिजली बोर्ड के कर्मचारी लगातार बिजली व्यवस्था को बहाल करने में जुटे हुए थे। रविवार रात दस बजे तक क्षेत्र के जगनी, नाहलना, दंदेल, सांई, न्यारा और चौहला को छोड़कर क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में बिजली व्यवस्था बहाल कर दी गई थी। क्षेत्र के न्यारा, दंदेल, साई, जगनी, नाहलना और चौहला में सोमवार को तीन दिन बाद सोमवार शाम पांच बजे तक बिजली व्यवस्था बहाल हुई। बिजली व्यवस्था को बहाल करने में जुटे कर्मियों ने किसी भी प्रकार के सुरक्षा उपकरणों को नहीं अपनाया हुआ था। इस दौरान कर्मी चप्पल पहन कर काम करते हुए नजर आए। वहीं इस संबंध में विद्युत बोर्ड जयसिंहपुर के सहायक अभियंता सुशील शर्मा ने बताया कि इंशुलेटरों पर बिजली गिरने और अधंड़ से तारों के टूट जाने के कारण समस्या पैदा हुई थी, लेकिन अब सभी गांवों में बिजली व्यवस्था सुचारु हो गई है।
वहीं इस संदर्भ में बिजली बोर्ड के मुख्य अभियंता अजय गौतम ने बताया कि लाइनों को दुरुस्त करते समय सुरक्षा जरूरी है। समय-समय पर सभी उपमंडलों को दिशा-निर्देश दिए जाते हैं कि वे सावधानी बरतें। अगर कहीं ऐसा हुआ है तो इसकी जांच की जाएगी।