ज्वालामुखी मंदिर में रविवार को दर्शनों के लिए लाइन में लगे श्रद्धालु। संवाद
चामुंडा/ज्वालामुखी/कांगड़ा। जिला कांगड़ा में रविवार को छुट्टी के दिन भी शक्तिपीठों में उम्मीद के मुताबिक चहल-पहल नजर नहीं आई। दिनभर छाए रहे बादलों और खराब मौसम के चलते श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई। रविवार को जिले के तीनों मुख्य शक्तिपीठों में कुल 10,300 श्रद्धालुओं ने ही शीश नवाया।
मंदिरों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार ज्वालामुखी में 6,000 श्रद्धालु, श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम में 2,500 श्रद्धालु और बज्रेश्वरी देवी मंदिर कांगड़ा में 1,800 श्रद्धालु पहुंचे। भीड़ कम होने का एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में नहीं जूझना पड़ा और दर्शन सुचारू रूप से चलते रहे। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और सफाई के पुख्ता इंतजाम किए थे।
ज्वालामुखी मंदिर के अधिकारी मनोहर लाल शर्मा और कांगड़ा मंदिर की अधिकारी शिवाली ठाकुर ने बताया कि हालांकि अभी संख्या कम है, लेकिन मौसम साफ होते ही भीड़ बढ़ने की उम्मीद है। प्रशासन अब नववर्ष के उपलक्ष्य में उमड़ने वाली संभावित भीड़ के लिए विशेष रणनीति तैयार कर रहा है ताकि आने वाले दिनों में व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
चामुंडा मंदिर में 20 फुट की दूरी पर भड़के श्रद्धालु
श्रद्धालुओं की कम संख्या के बीच श्री चामुंडा मंदिर में रविवार को माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब बाहरी राज्यों से आए श्रद्धालु दर्शन की व्यवस्था को लेकर अड़ गए। दरअसल, मंदिर के गर्भगृह में मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है, जिसके कारण सुरक्षा की दृष्टि से सभी को 20 फुट दूर से ही दर्शन करवाए जा रहे हैं। मंदिर अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश से आए श्रद्धालुओं का एक जत्था अंदर जाकर दर्शन करने की जिद पर अड़ गया और सुरक्षाकर्मियों के साथ बहस करने लगा। हालांकि, पुजारी और सुरक्षा टीम के समझाने के बाद उन्हें शांत किया गया। प्रशासन का तर्क है कि निर्माण कार्य के चलते ऊपर से सामान गिरने का खतरा है, इसलिए वीआईपी सहित किसी को भी पास जाने की अनुमति नहीं है।