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सुनने की क्षमता में कमी को नजरअंदाज न करें, समय पर जांच जरूरी : डॉ. ओमेश

Sun, 23 Aug 2026 07:28 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
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तेज आवाज और लंबे समय तक ईयर फोन के इस्तेमाल से बचने की दी सलाह
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तेज संगीत और मशीनों के शोर से कानों को बचाएं, ईयर प्रोटेक्शन का करें इस्तेमाल
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। सुनने की क्षमता में कमी को उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। समय पर जांच, सही निदान और उचित उपचार से श्रवण क्षमता से जुड़ी कई समस्याओं का समय रहते समाधान किया जा सकता है। अगर परिजनों को लगता है कि बच्चा उनके बोलने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा तो तुरंत विशेषज्ञों से बच्चे की जांच करवाएं। समय पर जांच और उपचार से बच्चे की सुनने की क्षमता को 100 फीसदी तक ठीक किया जा सकता है।
डिफनेस अवेयरनेस वीक से पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा डॉ. ओमेश भारती ने लोगों से श्रवण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और सुनने में किसी भी तरह की परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों में सुनने की क्षमता की जल्द जांच बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बच्चा आवाज पर प्रतिक्रिया नहीं देता, बोलने में देरी हो रही है या भाषा विकास उम्र के अनुसार नहीं हो रहा है तो अभिभावकों को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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ऐसे मामलों में जल्द से जल्द श्रवण विशेषज्ञ या ईएनटी चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए। समय पर समस्या का पता चलने से बच्चे के बोलने, सीखने और सामाजिक विकास में मदद मिल सकती है। लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने से भी सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। तेज संगीत सुनने, लंबे समय तक हेडफोन या ईयरफोन इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। पटाखों, मशीनों और कार्यस्थल पर अधिक शोर के बीच काम करने वाले लोगों को ईयर प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करना चाहिए।
इसके अलावा बिना चिकित्सकीय सलाह के ऐसी दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए, जो सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। कान में दर्द, लगातार सीटी या आवाज सुनाई देना, कान से पानी या मवाद आना अथवा अचानक सुनाई देना कम हो जाए तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
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कान की सफाई के नाम पर पिन, माचिस की तीली या अन्य वस्तु कान में डालना नुकसानदायक हो सकता है। इससे कान के पर्दे को चोट पहुंचने और संक्रमण का खतरा रहता है। कान से जुड़ी किसी भी समस्या में स्वयं उपचार करने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। सुनने में कठिनाई संवाद में बाधा हो सकती है, लेकिन जागरूकता, समय पर उपचार और संवेदनशील व्यवहार से हम एक अधिक समावेशी समाज बना सकते हैं। लोगों से अपील है कि वे स्वयं भी श्रवण स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और परिवार के बच्चों में सुनने की क्षमता तथा भाषा-विकास पर विशेष ध्यान दें।
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