शांतला (कांगड़ा)। सरकारें दिव्यांगों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती हैं लेकिन जमीनी हकीकत आज भी कई जरूरतमंद परिवारों के लिए बेहद दर्दनाक बनी हुई है। पुननी पंचायत के निवासी राकेश कुमार दो वर्ष पहले एक टांग गंवाने के बाद जिंदगी की कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन आज तक उन्हें सरकारी दिव्यांग पेंशन तक नसीब नहीं हो पाई।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के अनुसार राकेश कुमार 70 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग हैं। वहीं, कांगड़ा जोनल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र में इन्फेक्शन के कारण उनकी एक टांग घुटने के नीचे से काटे जाने की पुष्टि की गई है। इसके बावजूद सरकारी सहायता के नाम पर उन्हें केवल आश्वासन ही मिले।
राकेश कुमार ने बताया कि हादसे के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया और इलाज से लेकर रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया। कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी फाइल आगे नहीं बढ़ सकी।
पीड़ित के अनुसार यदि कैप्टन संजय पराशर मदद के लिए आगे नहीं आते तो शायद वह आज जीवित भी नहीं होते। कैप्टन संजय पराशर ने उनके इलाज का पूरा खर्च उठाया और आज भी हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दे रहे हैं।
राकेश कुमार और उनके परिवार ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के चुने हुए जनप्रतिनिधियों ने कभी उनकी सुध नहीं ली। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि राकेश कुमार को जल्द दिव्यांग पेंशन, आर्थिक सहायता और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए ताकि वह सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
उधर, वेलफेयर ऑफिसर रक्कड़ संजय मेहरा ने बताया कि प्रार्थी की ओर से ऑनलाइन आवेदन किए हुए दो से तीन महीने का समय हुआ है। पेंशन शुरू होने में सामान्यत करीब छह महीने तक का समय लग जाता है।