पालमपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के बयान ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री की ओर से जनता को लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहने की बात कहे जाने पर सुलह के विधायक विपिन सिंह परमार ने तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि यह बयान न केवल सरकार की विफलताओं को स्वीकारना है, बल्कि जनता को डराने की राजनीति का भी संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार झूठी गारंटियों के सहारे सत्ता में आई, लेकिन शासन में आते ही आर्थिक कुप्रबंधन और दिशाहीन नीतियों ने प्रदेश को संकट में धकेल दिया। एक ओर सरकार वित्तीय बदहाली का हवाला दे रही है, दूसरी ओर बोर्ड-निगमों में राजनीतिक नियुक्तियां और वीआईपी फिजूलखर्ची लगातार जारी है। इससे साफ है कि सरकार जनता पर बोझ डालकर अपनी नाकामियों को छिपाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने मांग की है कि सरकार अनावश्यक राजनीतिक नियुक्तियां समाप्त करे, वीआईपी खर्च पर रोक लगाए और जनता के सामने स्पष्ट रोडमैप रखे।