धर्मशाला। जिला मुख्यालय धर्मशाला के दाड़ी मैदान में चल रहा धुम्मूशाह मेला अपनी पारंपरिक पहचान और रौनक के लिए जाना जाता है लेकिन व्यापार मंडल और प्रशासन के बीच टकराव के चलते यह विवादों का अखाड़ा बनता जा रहा है। व्यापार मंडल ने आरोप लगाया है कि वर्तमान व्यवस्था से बड़े व्यापारियों को फायदा मिल रहा है, जिससे मेले की पारंपरिक पहचान प्रभावित हो रही है।
दाड़ी व्यापार मंडल के अध्यक्ष हर्ष ओबराय और मोहिंद्र सिंह सहित अन्य कारोबारियों ने कहा कि पहले मेला कमेटी द्वारा स्थानीय स्तर पर मेले का आयोजन किया जाता था लेकिन पिछले दो वर्षों से जिला प्रशासन इसकी जिम्मेदारी संभाल रहा है।
उनके अनुसार इस बदलाव के कारण मेला अब पारंपरिक स्वरूप से हटकर एक ट्रेड फेयर जैसा बन गया है, जिसमें छोटे कारोबारियों की भागीदारी कम होती जा रही है।
अब स्टॉल लगाने की लागत काफी बढ़ गई है और एक व्यापारी को सामान प्रदर्शित करने के लिए अधिक स्थान की आवश्यकता होती है, जिसके लिए लगभग तीन लाख रुपये तक खर्च करना पड़ सकता है। यह खर्च छोटे कारोबारियों के लिए वहन करना कठिन है।
वहीं, मेला अधिकारी एवं एसडीएम धर्मशाला मोहित रत्न ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन मेले का आयोजन अपनी मर्जी से नहीं कर रहा बल्कि यह उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है। पूर्व में मेला कमेटी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और अन्य कमियों की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद मामला अदालत में पहुंचा।
न्यायालय के निर्देश मिलने के बाद ही प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से मेले का संचालन शुरू किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मेले में सभी वर्गों के व्यापारियों के लिए अलग-अलग दरों पर स्थान निर्धारित किए गए हैं। यदि किसी को राजस्व या प्रक्रिया को लेकर संदेह है तो वह आरटीआई के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकता है।
मेला अधिकारी ने बताया कि इस वर्ष शिव मंदिर मैदान में मेला नहीं लगाया गया है, क्योंकि न्यायालय ने वहां आयोजन पर रोक लगा रखी है। मंदिर कमेटी से वित्तीय दस्तावेज मांगे गए थे लेकिन वे प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके चलते यह स्थिति बनी।