सिद्धपुर (धर्मशाला)। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे मची तबाही की गूंज हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की वादियों में भी महसूस की जा रही है। नेपाल के रसुवा और अन्य जिलों से आ रही तस्वीरों ने धर्मशाला क्षेत्र में लगभग 20,000 से अधिक गोरखाली समुदाय के लोगों को चिंता में डाल दिया है।
धर्मशाला के श्यामनगर, दाड़ी, तोतारानी, खनियारा और चीलगाड़ी सहित करीब 17 गांवों में बसे गोरखा परिवारों की नींद उड़ा दी है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में मोबाइल टावर गिरने और बिजली व्यवस्था ठप होने के कारण अपनों से संपर्क करना मुश्किल हो गया है। सैकड़ों परिवार दिन-रात टीवी और मोबाइल स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए हैं। स्थानीय स्तर पर समुदाय के लोग राहत राशि जुटाने के लिए भी चर्चा कर रहे हैं।
चीलगाड़ी की पूर्व पार्षद सावित्रा गुरुंग ने बताया कि नेपाल के चितवन (भंडारा जिले) में रहने वाली उनकी बहन सीता देवी से काफी मशक्कत के बाद संपर्क हो सका। परिवार सुरक्षित है, लेकिन नारंगघाट बाजार, जहां वे खरीदारी के लिए जाते थे, पूरी तरह तबाह हो चुका है।
उन्होंने भारत सरकार द्वारा पहुंचाई जा रही त्वरित सहायता के लिए आभार व्यक्त किया है। इसी तरह सिद्धबाड़ी की रेखा छेत्री और योल की अंजना ने ललितपुर में रह रहे अपने रिश्तेदारों ओम बहादुर और जेबी गुरुंग की कुशलता की खबर मिलने के बाद राहत की सांस ली है।
त्रासदी का एक पहलू यह भी है कि धर्मशाला के होटल और पर्यटन व्यवसाय में कार्यरत कई नेपाली प्रवासी अपनी नौकरियां छोड़कर तुरंत घर लौटने की तैयारी में हैं। कई परिवारों के घर बाढ़ में बह गए हैं, लेकिन परिवहन व्यवस्था ठप होने के कारण वे चाहकर भी अपने गांव नहीं पहुंच पा रहे हैं।
धर्मकोट में रेस्टोरेंट चलाने वाले मनजीत गुरुंग ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि धादिड़ जिले में स्थित उनके घर तक जाने वाले सभी रास्ते बंद हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल में स्थिति अत्यंत गंभीर है और वहां राशन की आपूर्ति भी पूरी तरह ठप हो चुकी है। अपनों की सुरक्षा को लेकर यहां रह रहे प्रवासी तनाव में हैं। संवाद