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Kangra News: बेमौसम बारिश से आम की फसल पर संकट

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नूरपुर (कांगड़ा)। पहले सूखा, फिर तापमान में उतार-चढ़ाव और अब बेमौसम बारिश से स्टोन फ्रूट (आम) की पैदावार पर संकट खड़ा हो गया है। शुरुआती दौर में आम के बगीचों में अच्छी फ्लावरिंग के बाद परागण प्रक्रिया (फ्रूट सेटिंग) के दौरान तापमान में एकाएक परिवर्तन के चलते आम की फसल के पाउडरी मलडियू रोग की चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है। आने वाले दिनों में मौसम का यही मिजाज रहा तो आम की पैदावार में प्रदेश भर में अव्वल जिला कांगड़ा में स्टोन फ्रूट के उत्पादन को तगड़ा झटका लग सकता है। हालांकि, इस बार आम की फसल का ऑन ईयर होने के चलते आम की बंपर फसल होने की उम्मीद की जा रही है। लेकिन मौसम की बेमिजाजी से अब बागवानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें पड़ने लगी है। आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो जिला कांगड़ा में 41 हजार 700 हेक्टेयर भूमि में फलों का उत्पादन होता है। इसमें से करीब 21 हेक्टेयर भूमि में सिर्फ आम की फसल होती है। शेष 2,712 हेक्टेयर में लीची, 9,465 हेक्टेयर में नींबू, 812 हेक्टेयर में अखरोट, 454 हेक्टेयर में सेब और करीब दो हजार हेक्टेयर भूमि में अमरूद, आंबला एवं पपीते की खेती होती है। लेकिन इस बार फिलहाल मौसम की बेमिजाजी के चलते आम की बंपर फसल की आस लगाए बैठे बागवानों की उम्मीदों को झटका लगने के आसार बनते दिख रहे हैं।
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नूरपुर क्षेत्र के बागवानों मुकेश शर्मा, सूरम सिंह, सुदर्शन शर्मा, मनोज पठानिया, दलजीत पठानिया, उपेंद्र सिंह, ऋषि पठानिया, प्रीतम मंहास, कुलजीत राणा आदि ने बताया कि इस बार ऑन ईयर में आम की बंपर पैदावार होने की उम्मीदों पर बेमौसम बारिश ने पानी फेर दिया है। अगर अगले कुछ दिन तक यह सिलसिला जारी रहा तो आम उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि फ्रूट सेटिंग के समय पर मौसम गर्म होने की बजाय घटते-बढ़ते तापमान और नमी से परागण प्रक्रिया प्रभावित होने से उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ
प्रधान वैज्ञानिक उद्यान क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र जाच्छ के डॉ. राजेश कलेर ने बताया कि फिलहाल यह बारिश आम की फसल के लिए कोई ज्यादा नुकसानदायक नहीं है, लेकिन आने वाले दिनों में तापमान में उतार-चढ़ाव और नमी के चलते उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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