अमर उजाला ब्यूरो
टांडा (कांगड़ा)। प्रदेश के दूसरे मेडिकल कॉलेज टांडा की स्थापना निचले हिमाचल के मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए हुई थी। प्रदेश के दूसरे बड़े अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लेने के लिए अमर उजाला की टीम शुक्रवार रात 10 बजे और शनिवार सुबह 9 बजे टांडा मेडिकल कॉलेज के महिला प्रसूता वार्ड में पहुंची। वहां देखा गया कि इस वार्ड में एक बेड पर दो-दो गर्भवती महिलाओं लिटाया गया था।
एक बेड पर दो महिलाओं का इलाज चल रहा था। पूरे वार्ड के बेड दो-दो महिलाओं से भरे थे। मरीज महिलाएं बेड पर ठीक से सो भी नहीं पा रही थीं। तीमारदारों ने बताया कि एक बेड पर दो मरीज होने से इंफेक्शन भी हो सकता है। इतने बड़े अस्पताल में खासकर प्रसूता वार्ड में बेड ज्यादा होने चाहिए या इसके वार्ड ज्यादा हों। उन्हें भी रात को ठंडे फर्श पर सोना पड़ता है। एक बेड पर आखिर दो-दो महिलाएं सोने को मजबूर क्यों हैं।
शाहपुर विस क्षेत्र के बोह दरीणी से आई मीना कुमारी की टांडा में डिलीवरी हुई है। वह पिछले चार दिन से टांडा अस्पताल में एडमिट है। उसने बताया कि एक बेड पर दो-दो मरीज होने से काफी परेशानी हुई। शाहपुर की रहने वाली कविता की बहू की डिलीवरी भी टांडा अस्पताल में हुई। उसने बताया कि एक बेड पर दो मरीज लिटा दिए गए। सरकारी सेवाएं ऐसी नहीं होनी चाहिए। देहरा से संजो देवी की बेटी की भी डिलीवरी है। उनका कहना है की अगर ऐसी ही सुविधाएं देनी हैं तो सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल का तमगा क्यों ले रखा है। लग बलियाणा परागपुर के निवासी नरेश कुमार अपनी पत्नी कई साथ टांडा अस्पताल आए हैं। उन्होंने कहा कि टांडा में ऐसी सुविधाओं की उम्मीद नहीं थी।
टांडा पर दबाव कम करेंगे : परमार
स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने बताया कि टांडा अस्पताल में मरीजों की संख्या ज्यादा है। यहां 900 बेड हैं, जो भरे रहते हैं। डॉक्टर ईमानदारी से काम कर रहे हैं, लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ गई है। उन्होंने सलाह दी है कि अब उपमंडल स्तर के अस्पतालों को सुदृढ़ किया जाए ताकि टांडा पर दबाव कम हो। उपमंडल स्तर के अस्पतालों में सरकार बेहतर उपचार शुरू करने की कोशिश कर रही है। मातृ शिशु अस्पताल भी जल्द बनाने को लेकर काम चल रहा है।