नादौन (हमीरपुर)। पुलिस थाना नादौन के कलूर में बस और मोटरसाइकिल की टक्कर में दंपति की मौत हो गई। महिला ने मौके पर दम तोड़ दिया है, जबकि पति की अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। हादसे में डेढ़ वर्षीय बेटा गंभीर घायल है, उसे नादौन अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।
जानकारी के अनुसार वीरवार सुबह करीब साढ़े 12 बजे एचआरटीसी धर्मशाला डिपो की बस धर्मशाला से शिमला वाया चंडीगढ़ रूट पर जा रही थी। जैसे ही बस कलूर के पास पहुंची, तीखे मोड़ पर सामने से आ रही बाइक बस से जा टकराई। हादसे में महिला शिवानी पत्नी संजीव कुमार शांतला पंचायत के घरथोली गांव निवासी की मौके पर जबकि उसके पति संजीव कुमार (30) पुत्र निक्की चंद निवासी शांतला की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। नादौन अस्पताल में चिकित्सकों ने संजीव को मृत घोषित कर दिया। वहीं, इनका डेढ़ साल का बेटा गंभीर घायल हो गया है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दंपति के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए क्षेत्रीय अस्पताल भेज दिया। थाना प्रभारी सतीश कुमार का कहना है कि पुलिस ने मामला दर्जकर कार्रवाई शुरू कर दी है।
हादसे के बाद घरथोली गांव में छाया मातम
पति-पत्नी की मौत से सानिध्य से सिर से उठा मां-बाप का साया
अमर उजाला ब्यूरो
पीरसलूही (कांगड़ा)। परागपुर विकास खंड की शांतला पंचायत के गांव घरथोली में वीरवार को उस समय मातम पसर गया, जब गांव के नौजवान दंपति की बस-बाइक दुघर्टना में दर्दनाक मौत हो गई। जबकि डेढ वर्षीय उनका बेटा गंभीर घायल हो गया। समाचार मिलते ही मृतकों के परिजनों पर पहाड़ ही टूट पड़ा, जबकि गांव में अफरातफरी मच गई और माहौल गमगीन हो गया। पिता निक्की नंद शर्मा और माता शीला देवी को क्या पता था कि उनका बेटा बाइक पर सवार होकर आज अपने जीवन की अंतिम सवारी करेगा। पत्नी शालिनी शर्मा और डेढ़ वर्षीय बेटे सानिध्य के साथ सवार होकर संजीव शर्मा सुबह लगभग साढ़े 10 बजे नादौन शहर से शॉपिंग के लिए निकले थे। जैसे ही वे कल्लूर गांव पहुंचे कि सामने से आ रही एचआरटीसी की बस से उनकी बाइक टकरा गई। टक्कर लगते ही शालिनी शर्मा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि संजीव शर्मा की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। इस टक्कर में बेटा सानिध्य भी गंभीर घायल हो गया। उसे टांडा अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। संजीव की अभी तीन साल पहले ही शादी हुई थी। संजीव अपने पिता तथा बड़े भाई पंकज के साथ कारोबार कर रहे थे तथा खुशी- खुशी अपना जीवन निर्वाह कर रहे थे, लेकिन काल के क्रूर हाथों ने उन्हें इस दुनिया से अलविदा कर दिया, जबकि सानिध्य अपनी मां की ममता तथा पिता के प्यार से मरहूम हो गया।