धर्मशाला। पारिवारिक अदालत पालमपुर ने एक अहम फैसला सुनाते हुए पति-पत्नी के बीच शादी के दो माह बाद से चल रहे विवाद में विवाह समाप्त करने का आदेश दिया है। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश धीरू ठाकुर की अदालत ने पत्नी द्वारा की गई मानसिक क्रूरता को आधार मानते हुए तलाक की डिक्री पारित की है।
याचिकाकर्ता ने हिंदू विवाह अधिनियम की धाराओं के तहत तलाक की अर्जी दायर की थी। पति ने अदालत को बताया कि 2022 में विवाह के बाद पत्नी केवल दो महीने ससुराल में रही। इस दौरान उसका व्यवहार पति और सास-ससुर के प्रति बेहद अपमानजनक था। अगस्त 2022 में वह बिना बताए दिल्ली चली गई और बाद में एसडीएम सुजानपुर के समक्ष पेश होकर स्पष्ट किया कि वह अपनी मर्जी के खिलाफ हुई इस शादी से खुश नहीं है और पति के साथ नहीं रहना चाहती।
मामले के दौरान पत्नी ने अदालत से मिले समन लेने से भी इनकार कर दिया और सुनवाई से अनुपस्थित रही, जिसके चलते उसे एक्स-पार्टी (एकतरफा) घोषित किया गया। ग्राम पंचायत प्रधान ने भी पति के आरोपों की पुष्टि की। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पत्नी का व्यवहार और वैवाहिक दायित्वों को निभाने से इनकार करना पति के लिए मानसिक प्रताड़ना के समान है। हालांकि, अदालत ने परित्याग के आधार को अपर्याप्त माना, लेकिन मानसिक क्रूरता सिद्ध होने पर तलाक मंजूर कर लिया।