धर्मशाला। फतेहपुर और जवाली में प्रस्तावित दो महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की एनओसी मंजूरी अटकने के कारण अधर में लटक गया है। पहले बीबीएमबी की ओर से इन पुलों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) को मंजूरी दे दी थी, लेकिन हिमाचल और पंजाब के बीच विवाद बढ़ने पर मंजूरी को रोक दिया है।
हाल ही में चंडीगढ़ में बीबीएमबी की एक और बैठक हुई है। अब फिर बीबीएमबी की ओर से दोनों पुलों की एनओसी को लेकर फिर से निर्णय लिया जाना है। बरसात के बाद इन परियोजनाओं पर काम शुरू किया जाना था। यह काम लोक निर्माण विभाग की ओर से किया जाना था, लेकिन एनओसी की रुकावट के चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
केंद्रीय सड़क निधि परियोजना के तहत 189.99 करोड़ रुपये की लागत से ये दोनों पुल बनने हैं। फतेहपुर के पौंग डैम से ब्यास नदी पर 800 मीटर लंबा पुल 103.65 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाना प्रस्तावित है, जो जसूर-डमटाल मार्ग को जोड़ने का काम करेगा। वहीं, जवाली के देहरी-हड़सर-जरोट-नगरोटा सूरियां मार्ग पर गज खड्ड पर पुल के निर्माण के लिए 86.34 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इन पुलों के बनने से न केवल लाखों लोगों को यातायात में सुविधा मिलेगी, बल्कि हिमाचल और पंजाब के बीच यात्रा दूरी भी घटेगी, जिससे समय और धन की बचत होगी। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से दोनों परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है। ऐसे में अब बीबीएमबी दोबारा एनओसी जारी करता है तो ही पुलों का निर्माण कार्य शुरू हो सके।
बीबीएमबी की ओर से पहले की गई बैठक में एनओसी को मंजूरी दे दी गई थी। बरसात के बाद पुलों को निर्माण कार्य शुरू किया जाना था। मगर हाल ही में हिमाचल-पंजाब के बीच हुए विवाद के कारण बीबीएमबी ने एनओसी पर रोक लगा दी। अब फिर से बैठक हुई है। दोबारा से एनओसी के लिए निर्णय लिया जाएगा।
-इंद्र सिंह उत्तम, अधीक्षण अभियंता (डिजाइन), लोक निर्माण विभाग कांगड़ा-चंबा