डमटाल (कांगड़ा)। उपमंडल इंदौरा के मंड, काठगढ़, मंड सनौर और अरनी विश्वविद्यालय के आसपास के क्षेत्रों में संभावित बाढ़ और नदी कटाव को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मानसून से पहले अरनी विश्वविद्यालय प्रशासन ने केंद्र सरकार, हिमाचल सरकार, केंद्रीय जल आयोग और अन्य संबंधित विभागों को ज्ञापन भेजकर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में पौंग बांध से छोड़े जाने वाले पानी और ब्यास नदी के किनारों पर हुए खनन गतिविधियों के कारण नदी के प्राकृतिक स्वरूप में बदलाव देखने को मिला है। इससे नदी तटों पर कटाव बढ़ने और आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है।
बाढ़ के आकलन के दौरान ब्यास नदी में मिलने वाली 10 से 12 छोटी-बड़ी खड्डों के जल प्रवाह को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता, जबकि बरसात के समय इनका अतिरिक्त पानी स्थिति को और गंभीर बना सकता है।
वहीं, बीबीएमबी ने स्पष्ट किया है कि पौंग बांध का संचालन निर्धारित नियमों और वैज्ञानिक मानकों के अनुसार किया जाता है। बोर्ड के अनुसार जल निकासी संबंधी निर्णय तकनीकी विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर लिए जाते हैं और बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ा जाता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने ज्ञापनों में बाढ़ सुरक्षा, नदी प्रबंधन और खनन गतिविधियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। अरनी विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. विवेक सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य भय का माहौल बनाना नहीं बल्कि संभावित जोखिमों को देखते हुए समय रहते स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। मानसून के मद्देनजर अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।