पालमपुर (कांगड़ा)। हिमाचल के पालमपुर में ट्यूलिप की खेती और रोपण सामग्री तैयार करने की तकनीक अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंचेगी।
नई दिल्ली के विभिन्न पार्कों और हरित क्षेत्रों में रंग-बिरंगे ट्यूलिप खिलाने के लिए सीएसआईआर-हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-आईएचबीटी), पालमपुर और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने हाथ मिलाया है। दोनों संस्थानों के बीच इस संबंध में वीरवार को समझौता हुआ है। सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव ने समझौते की पुष्टि की है।
समझौते के तहत सीएसआईआर-आईएचबीटी ट्यूलिप की रोपण सामग्री के गुणन और संवर्धन में एनडीएमसी को तकनीकी एवं वैज्ञानिक सहयोग देगा। एनडीएमसी की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले ट्यूलिप बल्बों का पालमपुर स्थित संस्थान में आगे गुणन किया जाएगा। इसके बाद तैयार रोपण सामग्री का इस्तेमाल नई दिल्ली के उपयुक्त उद्यानों और हरित क्षेत्रों में ट्यूलिप की खेती और प्रदर्शन के लिए किया जाएगा।
राजधानी के अलग-अलग उद्यानों में ट्यूलिप की खेती के विस्तार की योजना से दिल्ली के पार्कों को नया आकर्षण मिलने की उम्मीद है। अभी ट्यूलिप की खेती मुख्य रूप से ठंडे क्षेत्रों से जोड़ी जाती है, लेकिन वैज्ञानिक तकनीक और उपयुक्त रोपण सामग्री के जरिये इसे अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। पालमपुर का सीएसआईआर संस्थान इस दिशा में वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध करवाएगा।समझौते का एक प्रमुख उद्देश्य ट्यूलिप की रोपण सामग्री की व्यवस्थित तरीके से उपलब्धता बढ़ाना है। एनडीएमसी द्वारा उपलब्ध कराए गए बल्बों को सीएसआईआर-आईएचबीटी में गुणित और संवर्धित किया जाएगा। इससे भविष्य में बड़े स्तर पर ट्यूलिप की खेती के लिए आवश्यक रोपण सामग्री तैयार की जा सकेगी। समझौते पर सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ. सुदेश कुमार यादव और एनडीएमसी के निदेशक (उद्यान) जितेंद्र सिंह डाबस ने हस्ताक्षर किए।
पालमपुर के ट्यूलिप गार्डन से मिली पहचान
सीएसआईआर-आईएचबीटी पालमपुर में पहले से ट्यूलिप की विभिन्न किस्मों की खेती की जाती है। संस्थान का ट्यूलिप गार्डन पर्यटकों और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता है। अब इसी वैज्ञानिक विशेषज्ञता और रोपण सामग्री के जरिये राजधानी दिल्ली में भी ट्यूलिप के विस्तार की दिशा में काम होगा। सीएसआईआर-आईएचबीटी की वैज्ञानिक विशेषज्ञता और एनडीएमसी के व्यापक उद्यानिकी नेटवर्क तथा उपलब्ध बुनियादी ढांचे के समन्वय से फ्लोरीकल्चर और सजावटी उद्यानिकी को बढ़ावा देने की उम्मीद है। दोनों संस्थानों की यह साझेदारी वैज्ञानिक ज्ञान और उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल से राजधानी में ट्यूलिप की खेती को बड़े स्तर पर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।