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Kangra News: मोटे अनाज के व्यंजनों से आर्थिकी को मिली मजबूती

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धर्मशाला। जिले में महिलाएं राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपनी जिंदगी संवारने के साथ ही आर्थिकी को भी सुदृढ़ कर रही हैं। महिलाएं मोटे अनाज सहित अन्य पारंपरिक व्यंजनों के उत्पाद तैयार कर रही हैं। इसमें वे अचार, सेपू और मसाला बड़ियां, पापड़, हल्दी, शहद, काली गेहूं का दलिया, आटा, चटनी, सिड्डू सहित प्राकृतिक मक्की का आटा सहित अन्य उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पाद तैयार करती हैं। ये उत्पाद न केवल खाने में स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर हैं। महिलाओं की ओर से तैयार किए गए इन उत्पादों की मांग अब धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। लोगों के जागरूक होने के कारण अब लगातार उत्पादों की मांग की जा रही है।
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इसके साथ ही विभाग की ओर से मोटे अनाज को प्रोमोट करने के लिए महिलाओं को मेलों सहित प्रदर्शनियों में भाग लेने का अवसर भी प्रदान किया जा रहा है।इससे महिलाओं की आर्थिकी मजबूत हो रही है। इसके अलावा समूहों के उत्पादों को हिमईरा शाॅप के माध्यम से भी लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी लक्ष्मी देवी ने बताया कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान पति की नौकरी छूट जाने के बाद दिल्ली से लौटकर स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया था। वर्तमान में धर्मशाला के कचहरी में हिम ईरा दुकान चलाती हैं। दुकान में उनके समूहों की ओर से बनाए गए उत्पादों को रखा गया है। इसके साथ ही वह रागी के मोमोज भी बनाती हैं।
कांगड़ा जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ठाकुर ने बताया कि कांगड़ा में 2011 से अब तक 8266 स्वयं सहायता समूह पंजीकृत हुए हैं। इस समूहों के माध्यम से कांगड़ा की 62116 महिलाओं ने अपनी आर्थिकी सुधारी है और अभी भी काम कर महिलाएं अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं।
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