धर्मशाला। फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक और प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बंद करने पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। बुधवार को धर्मशाला में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि आरडीजी को समाप्त करना वित्तीय और आर्थिक आतंकवाद के समान है। यह केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश की सरकार को डराने का कुप्रयास है। पठानिया ने कहा कि आरडीजी प्रदेश का सांविधानिक अधिकार है। पहाड़ी राज्यों की अपनी विशिष्ट जरूरतें और उम्मीदें होती हैं। राजस्व के मामलों में इन राज्यों की तुलना मैदानी और बड़े राज्यों से करना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने आरडीजी को बंद कर प्रदेश सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया है, लेकिन वह अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाएगी।
उन्होंने कहा कि आरडीजी किसी मुख्यमंत्री, प्रदेश सरकार या पार्टी के लिए नहीं, बल्कि हिमाचल की जनता के लिए आवश्यक है। भाजपा विधायकों और सांसदों को भी इस मामले को केंद्र के समक्ष उठाना चाहिए।
विधायक ने यह भी कहा कि भाजपा शासन के दौरान प्रदेश को 5400 करोड़ रुपये आरडीजी और अतिरिक्त जीएसटी इनपुट मिले थे, बावजूद इसके पूर्व भाजपा सरकार कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग, डीए और एरियर का भुगतान नहीं कर पाई। पठानिया ने यह सवाल भी उठाया कि यदि आरडीजी को बंद करना था, तो 15वें वित्तायोग के दौरान ही यह घोषणा क्यों नहीं की गई थी कि 16वें वित्तायोग में आरडीजी नहीं मिलेगा। अगर आरडीजी बहाल न हुई तो प्रदेश सरकार को प्रदेश में विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इस अवसर पर पूर्व प्रत्याशी देवेंद्र जग्गी, विजय इंद्र करण, हरभजन चौधरी, सुरेश पप्पी, राजकुमार अग्रवाल, संजीव गांधी, पुनीत मल्ली, अनुराग समेत अन्य कांग्रेस नेता भी उपस्थित रहे।