लंबागांव में रात को सड़क पर घूमते बेसहारा गौवंश। संवाद
लंबागांव (कांगड़ा)। लंबागांव में लावारिस पशुओं, विशेषकर गोवंश की लगातार बढ़ती संख्या से किसान और जनता बेहद परेशान है। लंबे समय से चली आ रही इस गंभीर समस्या का आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। राजनीतिक दल चुनावों के समय लावारिस पशुओं की समस्या खत्म करने के बड़े-बड़े दावे तो करते हैं लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का खामियाजा क्षेत्र के किसानों को अपनी उपजाऊ जमीन और फसलों के भारी नुकसान के रूप में भुगतना पड़ रहा है। कभी सोना उगलने वाली हजारों कनाल कृषि भूमि अब लावारिस पशुओं के डर से बंजर में तब्दील हो चुकी है। लावारिस गोवंश ने सड़कों पर भी आवाजाही मुश्किल कर दी है। क्षेत्र के लोगों और बुद्धिजीवी वर्ग ने सभी राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
लावारिस पशुओं ने खेती करना मुश्किल कर दिया है। किसान महीनों मेहनत करता है लेकिन पशुओं का झुंड कुछ ही समय में फसल नष्ट कर देता है। हालात यह हैं कि लोगों ने खेती करना ही छोड़ दिया है। -रविकांत शर्मा, उपप्रधान, सोल बनेहड़ पंचायत
लावारिस गोवंश अब केवल खेतों की समस्या नहीं है। यह सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। रात के समय सड़कों पर बैठे पशुओं के कारण वाहन चालकों, विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है। -युद्धवीर नरियाल, पंचायत प्रधान, लंबागांव
क्षेत्र में एक गोसदन बनाया गया है लेकिन समस्या फिर भी जस की तस है। सरकार को गोसदनों की क्षमता बढ़ाने, उनके रखरखाव की व्यवस्था करने और खुले में पशु छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है। -शिव कुमार चौधरी, उपप्रधान, तलवाड़
लंबागांव में रात को सड़क पर घूमते बेसहारा गौवंश। संवाद
लंबागांव में रात को सड़क पर घूमते बेसहारा गौवंश। संवाद
लंबागांव में रात को सड़क पर घूमते बेसहारा गौवंश। संवाद
लंबागांव में रात को सड़क पर घूमते बेसहारा गौवंश। संवाद