टांडा (कांगड़ा)। सीटू ने वीरवार को टांडा मेडिकल कॉलेज के मुख्यद्वार पर धरना-प्रदर्शन किया। धरने में मजदूरों के अधिकारों के हनन और शोषण पर कड़ी निंदा की गई। प्रदर्शनकारियों ने मोदी सरकार की कार्पोरेट परस्त नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और मजदूरों की लंबी अवधि की शिफ्ट और मूलभूत सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए।
टांडा मेडिकल कॉलेज कर्मचारी यूनियन सीटू के प्रधान संजय कुमार और सीटू के जिला उपाध्यक्ष चतर सिंह ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि मजदूरों के दमन पर तुरंत रोक लगाई जाए। यूनियन नेताओं ने कहा आज देश में मजदूरों से 12-12 घंटे काम करवाया जा रहा है और मजदूरों को ईपीएफ और ईएसआईसी जैसी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है, जो सीधा सीधा संवैधानिक अधिकारों पर हमला है।
सीटू से संबंधित यूनियनें मोदी सरकार से मांग करती हैं कि ठेकेदारों और निजी क्षेत्र, आउटसोर्स कर्मियों के शोषण करने वाले जिम्मेदार समूहों पर कार्रवाई की जाए और लेबर कोड तथा ठेका आउटसोर्स जैसी नीतियों को तत्काल वापस लिया जाए। ऐसा न होने पर जिला कांगड़ा में भी सीटू के नेतृत्व में केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ मजदूर सड़कों पर निकलने को मजबूर होंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी केंद्र व प्रदेश सरकारों की होगी। धरना प्रदर्शन में टांडा मेडिकल कॉलेज कर्मचारी यूनियन के सैकड़ों लोग शामिल हुए। संवाद