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चंबा-भरमौर आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित : मेद सिंह

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धर्मशाला। चंबा और जनजातीय क्षेत्र भरमौर में रहने वाले लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुविधाएं न मिलने से अनेक परिवार पलायन को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं पर सिर्फ चर्चा ही नहीं बल्कि उनके ठोस समाधान खोजने की जरूरत है। यह बात मेरा गांव मेरा स्वाभिमान संस्था के चेयरमैन मेद सिंह ने शनिवार को धर्मशाला में प्रेस वार्ता के दौरान कही।
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मेद सिंह ने कहा कि 21वीं सदी में देश डिजिटल तरक्की की राह पर आगे बढ़ रहा है। मगर जनजातीय क्षेत्रों के लोग खान-पान, सड़क व संचार कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समस्याओं पर केवल चर्चा नहीं बल्कि ठोस समाधान की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से संस्था का गठन किया गया है और ‘आदर्श गांव हो अपना’ अभियान की शुरुआत की गई है।
उन्होंने कहा कि रावी नदी के जल से छोटे-बड़े पावर प्रोजेक्ट्स से लगभग 2000 मेगावाट बिजली का उत्पादन और करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ स्थानीय जनता तक नहीं पहुंच रहा। खराब सड़क कनेक्टिविटी के कारण किसान अपनी उपज समय पर मंडी तक नहीं पहुंचा पाते और उन्हें हर साल भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
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मेद सिंह ने कहा कि पलायन, लघु उद्योगों का विलुप्त होना, प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन, धार्मिक स्थलों की उपेक्षा और सड़क-संचार कनेक्टिविटी की बदतर स्थिति आज भी हजारों परिवारों के जीवन की सबसे बड़ी समस्याएं हैं। उन्होंने भरमौर से कांगड़ा को जोड़ने वाली सुरंग (टनल) निर्माण की मांग उठाई। इस परियोजना से क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, पलायन रुकेगा और पर्यटन, व्यापार तथा आपातकालीन सेवाओं को गति मिलेगी।
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