ज्वालामुखी मंदिर में दर्शन करते ध्यानयोगी । संवाद
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। सनातन परंपराओं के महासंगम अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर बुधवार को ज्वालामुखी में ब्राह्मण सभा द्वारा भगवान परशुराम जन्मोत्सव मनाई गई। यह पुण्यतिथि ब्राह्मण समाज और सनातन धर्मावलंबियों के लिए विशेष महत्व रखती है। इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का प्राकट्य हुआ था।
अक्षय तृतीया पर ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। ब्राह्मण सभा ज्वालामुखी ने इस अवसर पर सामूहिक यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार का भव्य आयोजन किया, जिसमें दर्जनों बच्चों ने वैदिक परंपरा के अनुसार जनेऊ धारण कर ब्रह्मचार्य आश्रम में प्रवेश किया। वेदपाठ, मंत्रोच्चारण और यज्ञ के साथ यह संस्कार पूर्ण विधिविधान से संपन्न हुआ। संस्कार के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
मुख्य पुजारी एवं ब्राह्मण सभा के प्रधान डिंपल शर्मा ने बताया कि परशुराम जन्मोत्सव और अक्षय तृतीया होने के कारण इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यह दिन धर्म, दान और संस्कारों का प्रतीक है। मां ज्वालाजी गुरुकुल ज्वालामुखी संयोजक वासुदेव शर्मा के नेतृत्व में गुरुकुल के शिष्यों ने भगवान परशुराम की भव्य झांकी निकाली। शंखध्वनि, मंत्रोच्चारण और पारंपरिक वेशभूषा में सजे बाल शिष्यों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
झांकी मार्ग में लोगों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर भगवान परशुराम का स्वागत किया। इस अवसर पर सभा के उपप्रधान दिनेश रत्न, विशाल दत्त, हिमांशु गर्ग, अश्वनी कुमार दत्त, गौरव शर्मा, संदीप शर्मा, मुकेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
ज्वालामुखी मंदिर में दर्शन करते ध्यानयोगी । संवाद