धर्मशाला। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के धर्म एवं संस्कृति विभाग की ओर से आधुनिक विज्ञान विषय पर भिक्षुओं और भिक्षुणियों के लिए 10वीं कार्यशाला तिब्बती पुस्तकालय एवं अभिलेखागार में आरंभ हुई। यह दो सप्ताह का विशेष कार्यक्रम 15 से 26 सितंबर तक चलेगा। कार्यशाला में विभिन्न मठों और ननरियों से आए 29 भिक्षु-भिक्षुणियां भाग ले रहे हैं। इनमें पलयुल चोक्होर लिंग, बोकर श्रेदा, थेकछोक नामद्रोलिंग, गेदेन चोलिंग ननरी, जोंगकार चोएदे, काग्यू लावा थेकछेन लिंग मठ, सालुगारा सेड-ग्युएड बौद्ध अध्ययन संस्थान, समतेनलिंग ननरी, द्रिकुंग काग्यू जंगचुबलिंग मठ, पल शेनतेन मेनरिलिंग, बौद्ध तर्कशास्त्र संस्थान, डोलमा लिंग ननरी, खाचोए गख्यिल लिंग ननरी, थुक्छे चोलिंग ननरी, जॉनांग ङेदोन ताक्तेन शेद्रुब चोक्होर लिंग और जॉनांग कालचक्र मेडिटेशन संस्थान के प्रतिनिधि शामिल हैं। कार्यशाला के दौरान विज्ञान विभाग, तिब्बती पुस्तकालय एवं अभिलेखागार के चार विज्ञान शिक्षक प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देंगे। वर्ष 2011 में आयोजित 11वें धार्मिक सम्मेलन में दलाई लामा ने बौद्ध शिक्षाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार को लेकर विशेष मार्गदर्शन दिया था। इसके बाद 2013 में धर्म एवं संस्कृति विभाग ने विभिन्न बौद्ध परंपराओं के 50 प्रमुख मठों और ननरियों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर इस विषय पर गहन चर्चा की थी। उसी सम्मेलन में यह प्रस्ताव पारित हुआ था कि जहां विज्ञान की शिक्षा उपलब्ध नहीं है, वहां आधुनिक विज्ञान को धार्मिक शिक्षा से जोड़कर पढ़ाया जाए। इसी के तहत विभाग ने तिब्बती पुस्तकालय एवं अभिलेखागार के सहयोग से लगातार ऐसे आधुनिक विज्ञान कार्यशालाओं का आयोजन शुरू किया। यह 10वीं कार्यशाला उसी शृंखला की कड़ी है।