सदवां में बीएसएफ कर्मी जतिन धीमान की पार्थिव देह को सलामी देते जवान। -स्रोत ः जागरूक पाठक
नूरपुर/सुलयाली (कांगड़ा)। विधानसभा क्षेत्र नूरपुर की पंचायत सदवां के 24 वर्षीय जांबाज बीएसएफ जवान जतिन धीमान का विशेष कमांडो कोर्स की ट्रेनिंग के दौरान हृदयगति रुकने से निधन हो गया। वह रांची (झारखंड) में 157 बीएन बीएसएफ में तैनात थे। बुधवार को जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा तो हर आंख नम थी। हर ओर जतिन धीमान अमर रहे के नारे गूंज रहे थे।
जतिन की बलिदान की कहानी जितनी गौरवपूर्ण है, उतनी ही हृदयविदारक भी। उनके पिता भी बीएसएफ में तैनात थे और उनकी मृत्यु भी सेवा के दौरान हृदयगति रुकने से ही हुई थी। पिता के स्थान पर ही जतिन को बीएसएफ में नियुक्ति मिली थी। बताया जा रहा है कि पहले ट्रेनिंग के दौरान दौड़ लगाते समय जब वह गिर गए थे। इस बाद भी उन्होंने दौड़ लगाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन गिरने के बाद जतिन फिर उठे और दौड़ने लगे। इसके बाद उनका निधन हो गया।
23 फरवरी को ही घरवालों की इसकी सूचना मिली थी। इस घटना ने पूरे नूरपुर क्षेत्र में शोक की लहर है। जतिन के सम्मान में स्थानीय बाजार भी बंद रहे। जतिन की अंतिम यात्रा के दौरान सदवां स्कूल के पास एक अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिला। जिस स्कूल में जतिन ने शिक्षा पाई थी, वहां के शिक्षक और नन्हे छात्र सड़क के दोनों ओर कतारबद्ध होकर अपने नायक की विदाई में खड़े थे।
जतिन को पढ़ाने वाली एक अध्यापिका अपने आंसू नहीं रोक सकीं और फफक-फफक कर रो पड़ीं। मासूम बच्चों द्वारा पुष्प अर्पित किए जाने के इस दृश्य ने हर मौजूद व्यक्ति के कलेजे को चीर दिया। राजकीय सम्मान के साथ जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में जतिन का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।