भक्ति का मार्ग ईश्वर के प्रति प्रेम, समर्पण और विश्वास का मार्ग है, संक्रांति पर महामंडलेश्वर स
राजा का तालाब (कांगड़ा)। गद्दी सिद्ध बाबा श्री शिब्बोथान पतित पावन सिद्ध आश्रम भरमाड़ में संक्रांति पर संत समागम का आयोजन किया गया। इस मौके महामंडलेश्वर 1008 स्वामी सतीश वत्स ने प्रभु प्रेमी भक्तों को अपने प्रवचनों से निहाल किया। उन्होंने बताया कि भक्ति का मार्ग ईश्वर के प्रति प्रेम, समर्पण और विश्वास का मार्ग है, जिसमें कीर्तन, सुमिरन और सेवा मुख्य है। धर्म का मार्ग नीति, सदाचार, स्वधर्म और नैतिक मूल्यों का पालन है। हिंदू परंपरा में भक्ति के लिए नवधा भक्ति और जीवन के लिए कर्म, ज्ञान और योग को प्रमुख मार्ग माना गया है। ईश्वर से व्यक्तिगत संबंध स्थापित करना और उनके प्रति अटूट प्रेम रखना। निस्वार्थ भाव से सभी प्राणियों में ईश्वर को देखकर सेवा करना। फल की इच्छा के बिना अपने कर्तव्य का पालन करना। शास्त्रों के अध्ययन, आत्म-अन्वेषण और विवेक से सत्य को जानना। ध्यान और प्राणायाम के द्वारा मन को नियंत्रित कर ईश्वर से जुड़ना। यही भक्ति और धर्म के मार्ग हैं। संवाद