धर्मशाला। कांगड़ा जिले में देसी बकरियों की नस्ल सुधार की दिशा में पशुपालन विभाग ने एक नई पहल की है। अब पशुपालकों को देसी बकरियों के जरिये बीटल और जमनापरी नस्ल की उन्नत बकरियां पालने का अवसर मिलेगा। इसके लिए जिले के 11 पशु चिकित्सालयों में कृत्रिम गर्भधारण के लिए विशेष टीके उपलब्ध करवा दिए हैं। इन नस्लों की बकरियां अधिक दूध देती हैं और इनका वजन भी अधिक होता है, जिससे पशुपालकों की आमदनी में सीधा इजाफा होगा। पशुपालन विभाग द्वारा पहले चरण में नगरोटा बगवां में पांच बकरियों को ये टीके परीक्षण के रूप में लगाए गए, जो सफल रहे। अब बड़ोह, सद्दूं, जवाली और नूरपुर में यह मुहिम शुरू की है।
25 रुपये में किया जाएगा एक बकरी का कृत्रिम गर्भाधान
पशुपालन विभाग के अनुसार एक बकरी का कृत्रिम गर्भाधान महज 25 रुपये में किया जाएगा। इससे पैदा होने वाली बकरियों का वजन 30 से 40 किलोग्राम तक हो सकता है, जबकि स्थानीय देसी नस्लों का वजन अधिकतर 15 से 20 किलोग्राम ही होता है। दूध उत्पादन की दृष्टि से भी यह नस्लें फायदेमंद हैं। ये बकरियां प्रति दिन 1.5 से 2 लीटर तक दूध देती हैं।
बकरी पालन छोटे किसानों के लिए एटीएम
विशेषज्ञों के अनुसार बकरी पालन आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के लिए त्वरित आय का माध्यम बन सकता है। जब भी ज़रूरत हो, किसान बकरी बेचकर नकद आय अर्जित कर सकते हैं। कम लागत, सरल देखरेख और तेज़ लाभ इसे ग्रामीण क्षेत्र के लिए सुलभ स्वरोजगार बनाता है।
प्रशिक्षित किए गए पशु चिकित्सक
संबंधित क्षेत्रों के 11 चिकित्सालयों के पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया है। टीकों की अगली खेप पशुपालकों की मांग के अनुसार ढाई महीने बाद टीके मंगवाए जाएंगे। यह आपूर्ति मथुरा केंद्र से आएगी।
डॉ. सीमा गुलेरिया, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग कांगड़ा