सरकाघाट (मंडी)। भारतीय ज्ञान परंपरा को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से धर्मपुर के सज्याओ में ज्योतिष एवं आयुर्वेद विषय पर विद्वत सम्मेलन आयोजित किया गया। हिमाचल प्रदेश संस्कृत अकादमी शिमला के सौजन्य से हुए सम्मेलन में विद्वानों ने ज्योतिष, आयुर्वेद और संस्कृत की प्रासंगिकता पर विचार साझा किए। धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। अकादमी के राज्य सचिव डॉ. प्रवीण कुमार विमल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
सम्मेलन में पूर्व संस्कृत अकादमी सचिव डॉ. मस्त राम सहित विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों ने भारतीय संस्कृति में संस्कृत भाषा की भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. रमेश, गोपाल शास्त्री, हरिनंद शास्त्री, डॉ. ज्योति प्रकाश और आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमलता ने ज्योतिष एवं आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। हिमाचल दिव्यांग कल्याण समिति के प्रदेश महासचिव एवं सामाजिक कार्यकर्ता रमेश चंद भारद्वाज ने सुझाव दिया कि ज्योतिष, आयुर्वेद और भारतीय संविधान को पहली कक्षा से ही पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में बोर्डिंग स्कूल स्थापित कर विद्यार्थियों को संस्कृत, ज्योतिष, आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों का ज्ञान देने पर जोर दिया।
इस अवसर पर योग शिक्षक नेक राम शास्त्री, ज्येष्ठ एवं वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद की सरकाघाट इकाई के अध्यक्ष प्रकाश चंद चौहान, व्यापार मंडल सरकाघाट के प्रधान ब्रह्म दास, शिक्षाविद् रमेश ठाकुर, रतनाज राणा और रणजीत सिंह आदि उपस्थित रहे।