बरियाल (कांगड़ा)। पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलमार्ग पर ट्रेनों की बहाली को लेकर पहले दो साल से उत्तर रेलवे के उच्च अधिकारी तारीख पर तारीख दे रहे थे। अब रोजाना ट्रायल किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि रेलवे बोर्ड ट्रायल तो इस तरह कर रहा है कि इस नैरोगेज रेल ट्रैक पर जैसे कोई पांच सौ किमी प्रति घंटे की स्पीड से बुलेट ट्रेन चलानी हो।
वहीं, बार-बार हो रहे ट्रायल से जनता में उत्तर रेलवे बोर्ड और केंद्र सरकार के खिलाफ नाराजगी भी बढ़ने लगी है। ग्रामीणों का कहना है की दिसंबर से लगातार रेल ट्रैक के ट्रायल लिए जा रहे हैं और रेलगाड़ियां चलाने के लिए जब उत्तर रेलवे महाप्रबंधक से पूछा जा रहा है तो वह भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। इसी साल 12 जनवरी को उत्तर रेलवे महाप्रबंधक अशोक वर्मा ने जम्मू मंडल रेलवे के डीआरएम विवेक कुमार के साथ चक्की खड्ड रेलवे पुल का निरीक्षण किया। उसके बाद 17 जनवरी को पुल का रेल इंजन के साथ ट्रायल भी लिया गया। उसके बाद उत्तर रेलवे दिल्ली से 24 फरवरी को रेल सुरक्षा आयुक्त की ओर से अंतिम ट्रायल का पत्र जारी कर दिया गया। 24 फरवरी को उत्तर रेलवे सुरक्षा आयुक्त दिनेश चंद देशवाल ने भी तकनीकी टीम सहित जम्मू मंडल रेलवे के डीआरएम के साथ चक्की खड्ड रेल्वे पुल और पठानकोट से बैजनाथ तक छह कोच वाली रेल से सफल ट्रायल लिया। उसके बाद उत्तर रेलवे ने 28 फरवरी को ओएमएस उपकरण से रेल ट्रैक का निरीक्षण कर लिया। हालांकि, पहली मार्च से लगातार रोजाना चार कोच के साथ एक रेलगाड़ी गाड़ी पठानकोट से जोगिंद्रनगर तक अपडाउन कर रही है। इससे कांगड़ा के लोगों में रेल सेवा शुरू होने की उम्मीद लगातार बढ़ रही है। लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं एलीट ग्रुप के संयोजक पीसी विश्वकर्मा ने कहा कि ट्रायल पर ट्रायल कर कांगड़ा की जनता को आश्वासनों का लॉलीपॉप दिया जा रहा है।
उत्तर रेलवे मंडल जम्मू के डीआरएम विवेक कुमार का कहना है कि लगभग चार साल तक इस नैरोगेज रेलमार्ग पर ट्रेन बंद रहने के कारण रेल कोच के पहिये जाम हो गए हैं, इसलिए उनका रोजाना ट्रायल कर परीक्षण किया जा रहा है। जब सभी रेल कोच की रिपोर्ट सही हो जाएगी तो पठानकोट से बैजनाथ तक सीधी रेल सेवा बहाल कर दी जाएगी।