श्री नीलकंठ महादेव मंदिर हार में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में उपस्थित लोग। स्रोत: आयोजक
परागपुर (कांगड़ा)। श्री नीलकंठ महादेव मंदिर हार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन पर पंडित सुमित शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। शास्त्री ने कहा कि गिरिराज पर्वत को धारण करने के कारण श्रीकृष्ण गिरिधारी कहलाए। उन्होंने भक्तों को श्रीकृष्ण की गोपाष्टमी, धेनुकासुर उद्धार, कालिया मर्दन और गोवर्धन पर्वत को सात दिन-रात तक कनिष्ठिका अंगुली पर धारण करने की लीलाओं से रूबरू कराया। शास्त्री ने बताया कि माता यशोदा ने गोपाष्टमी का शुभ मुहूर्त निकालकर ब्राह्मण पूजन के उपरांत बालकृष्ण को गोचारण के लिए भेजा। यमुना तट पर मधुर बांसुरी की तान छेड़कर प्रभु ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा के दौरान भजन मन चल वृंदावन चलिए और मैं तो गोवर्धन को जाऊं मेरे वीर ने भक्तों को भक्ति रस में डूबो दिया।