बरियाल (कांगड़ा)। उपमंडल जवाली के टीका घाड़ और अमलेला के मौजा जरोट में चरागाह दरखतान भूमि को नौतोड़ के तहत भूमिहीनों को आवंटित करने का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर पर्यावरण प्रेमी गोरख सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह आवंटन सुप्रीम कोर्ट के गोदावर्मन मामले (रिट पेटिशन नंबर 202/1995) में 12 दिसंबर 1996 के फैसले का उल्लंघन है।
उन्होंने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दस्तावेज प्राप्त कर इस जानकारी को उजागर किया और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1100 पर भी शिकायत दर्ज करवाई है। गोरख सिंह के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने गोदावर्मन मामले में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि चरागाह दरखतान भूमि वन संरक्षण के तहत आती है और इसे वन भूमि की श्रेणी में रखा जाए।
इस आदेश के अनुसार केंद्र सरकार सहित सभी राज्यों को इसका पालन करने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके हिमाचल प्रदेश के जवाली उपमंडल में इस भूमि को नौतोड़ अलॉटमेंट एक्ट 1975 के तहत भूमिहीनों को आवंटित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामले नौतोड़ अलॉटमेंट एक्ट 1975 के सेक्शन 9ए के तहत जब भी सामने आएं, तो सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1100 पर कई शिकायतें दर्ज करवाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से इस पूरे मामले की गहन जांच करवाकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
उधर, डीएफओ नूरपुर अमित शर्मा का कहना है कि चरागाह दरखतान भूमि वन श्रेणी में आती है। इसे नौतोड़ में आवंटित नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि जवाली में भूमि आवंटन को लेकर शिकायत मिली है और विभाग इस मामले की जांच कर रहा है।