धर्मशाला। पहाड़ों की हवाओं के रुख पर निर्भर पैराग्लाइडिंग कारोबार को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में पर्यटन विभाग जिला कांगड़ा की ओर से कवायद शुरू कर दी गई है। उड़ान स्थलों पर मौसम की सटीक जानकारी जुटाने के लिए माइक्रो मेट्रोलॉजी तंत्र स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने से पहले विभाग सर्वे करवाएगा।
सर्वे के माध्यम से यह आकलन किया जाएगा कि किन स्थानों पर मौसम संबंधी उपकरण स्थापित करना जरूरी है और उनसे उड़ान संचालन को किस तरह बेहतर बनाया जा सकता है। जिला कांगड़ा में इंद्रूनाग, बीड़-बिलिंग और ज्वालामुखी के तहत बिल पट्टियां में पैराग्लाइडिंग गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
पैराग्लाइडिंग उड़ान की सफलता और सुरक्षा काफी हद तक हवा की गति, दिशा, तापमान और स्थानीय मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। ऐसे में मौसम से जुड़े सटीक आंकड़े उपलब्ध होने से पायलटों और संबंधित अधिकारियों को उड़ान के लिए अनुकूल परिस्थितियों का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
माइक्रो मेट्रोलॉजी तंत्र के तहत किसी विशेष क्षेत्र के स्थानीय मौसम का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। इससे बड़े क्षेत्र के सामान्य मौसम पूर्वानुमान के बजाय उड़ान स्थल के आसपास की परिस्थितियों की अधिक सटीक जानकारी जुटाने में सहायता मिलती है।
पर्यटन विभाग सर्वे के माध्यम से प्रस्तावित व्यवस्था की जरूरत, संभावित स्थानों और तकनीकी पहलुओं का आकलन करेगा। इसके बाद ही माइक्रो मेट्रोलॉजी तंत्र स्थापित करने को लेकर आगे की प्रक्रिया तय होगी। इससे मौसम संबंधी जानकारी को बेहतर बनाकर पैराग्लाइडिंग गतिविधियों के संचालन में मदद मिलेगी। हालांकि, मौसम की सटीक जानकारी मिलने के बावजूद उड़ान की अनुमति प्रशिक्षित पायलटों और अधिकृत अधिकारियों के सुरक्षा आकलन के आधार पर ही तय होगी।
जिला कांगड़ा में पैराग्लाइडिंग गतिविधियों को मौसम के अनुरूप सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए माइक्रो मेट्रोलॉजी तंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए सर्वे करवाया जाएगा। तंत्र स्थापित होने के बाद मौसम संबंधी जानकारी को बेहतर बनाकर पैराग्लाइडिंग गतिविधियों के संचालन में मदद मिलेगी। - विनय धीमान, पर्यटन अधिकारी, जिला कांगड़ा