थुरल के गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा सुनते भक्तजन। -संवाद
थुरल (कांगड़ा)। स्थानीय बाजार स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में चल रहा सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ शुक्रवार को पूजा-अर्चना के साथ संपन्न हुआ। कथा के अंतिम दिन स्वामी सुदर्शनाचार्य मधुसूदन ने प्रवचन में कहा कि सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति में काम आए। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा का सत्कार कर मित्र धर्म निभाया। परमात्मा का नाम सुमिरन ही सभी विपत्तियों और पापों का नाश करने वाला है।
उन्होंने बताया कि सुदामा ने सुमिरन किया और श्रीकृष्ण ने उनकी पुकार सुनकर कल्याण किया। कथा में भगवान के सोलह हजार एक सौ आठ विवाहों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि वेद के एक लाख मंत्रों में अस्सी हजार कर्म कांड, सोलह हजार उपासना कांड और चार हजार ज्ञान कांड के हैं। उपासना कांड के मंत्र ही भगवान की सोलह हजार पत्नियां बनकर प्रकट हुईं।
स्वामी सुदर्शनाचार्य ने कहा कि अहंकारयुक्त दान मनुष्य को नीच योनि में पहुंचा देता है। राजा नृग ने अहंकार से गौ दान किया और उन्हें गिरगिट की योनि प्राप्त हुई। दान, पुण्य, जप और तप को भगवान को अर्पित करने से ही कल्याण होता है। दान अपने से श्रेष्ठ को दिया जाता है, जो लोक और परलोक दोनों को सुधारता है।
उन्होंने कहा कि पृथ्वी को धारण करने वाले सात स्तंभ हैं गो माता, विप्र देव, वेद, भगवान, सती नारी, सत्य बोलने वाला मनुष्य, निर्लोभी और दानशील प्राणी। इनकी पुकार सुनकर ही परमात्मा प्रकट होते हैं। क्षमा वीर पुरुष का लक्षण है। भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर प्रहार किया, फिर भी उन्होंने क्षमा कर दी। इसी कारण भगवान विष्णु सभी देवताओं में श्रेष्ठ हैं।