धर्मशाला। अक्तूबर माह में चार त्योहारों से लोगों का बजट गड़बड़ा गया है। हालत यह है कि दीपावली को दो दिन बचे हैं, मगर बाजार सूने हैं। इससे व्यापारी वर्ग में भी उत्साह कम हो गया है। दुकानदारों ने भी दीपावली को लेकर कुछ खास तैयारियां करने से हाथ पीछे रखे हैं। व्यापारियों की मानें तो दशहरा उत्सव में लोगों ने जमकर खरीददारी की है, लेकिन एक ही माह में चार त्योहार होने से अब माह के अंत तक लोगों का उत्साह कम हो गया है। दशहरे के बाद करवाचौथ, दिवाली और बाद में भैया दूज है। इसलिए लोग अपने बजट को बड़े ध्यान से खर्च कर रहे हैं।
धर्मशाला के दुकानदारों की मानें तो पूर्व में दिवाली को लेकर लोगों में खासा उत्साह होता था। एक सप्ताह पूर्व ही मिठाइयों और उपहारों की खरीददारी शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार लोगों में खरीददारी को लेकर निराशा है। लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं। दिवाली से दो दिन पहले तक कुछ खास कारोबार भी नहीं हो पाया। हालांकि, व्यापारी वर्ग धनतेरस पर बाजारों में रौनक होने की आस लगाए बैठे हैं।
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महंगाई दर कम होने के आंकड़े भी फेल
केंद्र सरकार के पिछले माह के मुकाबले इस माह एक फीसदी महंगाई दर कम होने के आंकड़ों पर भी सवाल उठने लगे हैं। दिवाली में बाजार में सर्वाधिक सोनपापड़ी की बिक्री होती है। पिछले वर्ष सोनपापड़ी (घी) का बाजार में मूल्य 48 रुपये प्रति 250 ग्राम था, जबकि इस बार यह पैकेट उपभोक्ताओं को 68 रुपये में मिलेगा। सोनपापड़ी का 500 ग्राम का पैकेट 170 रुपये में इस बार मिल रहा है। ऐसे में सरकार के महंगाई दर कम होने के आंकड़ों की हवाई दिवाली में उड़ गई है।