ज्वालामुखी (कांगड़ा)। नगर परिषद ज्वालामुखी की ओर से लाखाें रुपये खर्च कर हर वार्ड में बनाए गए सामुदायिक भवन अब महिला बाल विकास विभाग के नियंत्रण में हैं। इससे दूल्हे के बारातियों को पूर्व की भांति नगर परिषद में मिलने वाली ठहराव की सुविधा से वंचित ही रहना पडे़गा। साथ ही वार्डों में रहने वाली जनता को भी इन सामुदायिक भवनों का कोई लाभ नहीं मिल पाएगा। क्योंकि, महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से सभी आधा दर्जन सामुदायिक भवनों में आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। जिनका बिजली का खर्च भी मौजूदा दौर में (जहां पर बिजली मौजूद हो उन भवनों में) नगर परिषद ही कर रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग का कोई खर्च नहीं हो रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिन सामुदायिक भवनों पर लाखों खर्च किये गए हैं, उनका लोगों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। दूसरी ओर नगर परिषद अपनी विभागीय साइट पर भी सामुदायिक भवनों के आंकड़ों को दिखा रही हैं। जबकि, मौजूदा वक्त में नगर परिषद के पास एक भी सामुदायिक भवन नहीं है, जिसे उपयोग में लाया जा सके। वहीं, अगर महिला एवं बाल विकास विभाग की बात करें तो यह विभाग भी अपने विभागीय आंकड़ों में ज्वालामुखी में चल रहे सामुदायिक भवनों में आंगनबाड़ी केंद्रों को अपना बता रहा है।
सामाजिक समारोहों के लिए बनाए गए हैं भवन : समाजसेवी
ज्वालामुखी के प्रबुद्ध नागरिक समाजसेवी चरणदास सूद, प्रताप चौधरी, प्रकाश, रमेश आदि का कहना है कि सामुदायिक भवन बनाने का उद्देश्य इतना था कि सामाजिक समारोहों के लिए इन्हें उपयोग में लाया जा सके, ना कि आंगनबाड़ी केंद्र खोल कर स्थानीय जनता को मिल रही सामुदायिक भवन की सुविधा को खत्म कर दिया जाए।
जानकारी के बाद ही कुछ कहा जा सकता है : ईओ
नगर परिषद ज्वालामुखी के कार्यकारी अधिकारी महेश दत्त का कहना है कि यह गंभीर विषय है। इसकी पूरी जानकारी लेने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है कि नगर परिषद के सामुदायिक भवनों में किन वजहों से आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं।
विभाग की ओर से चलाए जा रहे केंद्र : सीडीपीओ
सीडीपीओ देहरा प्रवीए कुमार का कहना है कि ज्वालामुखी नगर परिषद एरिया में विभाग द्वारा करीब आधा दर्जन आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं।